छत्तीसगढ़मुख्य समाचार

रुला गया हंसाने वाला; साहित्यकारों और कवियों ने बताये हास्य कवि सुरेंद्र दुबे के अनछुए किस्से

नंदकिशोर यादव

रायपुर: सबको हंसाने वाले छत्तीसगढ़ के प्रख्यात कवि और साहित्यकार पद्मश्री डॉक्टर सुरेंद्र दुबे के निधन से सबकी आंखें नम हैं। ‘टाइगर’ अब यादों में जिंदा रहेगा। आज शुक्रवार को रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र अभिषेक दुबे ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान देश-प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि, लेखक, अभिनेता, गायक, राजनेता और आम नागरिक शामिल हुए। सभी ने उनके साथ अपने बिताये अनछुए किस्सों को बयां किया।

देश के फेमस कवि कुमार विश्वास ने कहा कि वो छत्तीसगढ़ के गौरव थे। मेरे साथ देश-विदेश में कई कार्यक्रमों में उन्होंने शिरकत किया था। उनके जाने से इस खालीपन के भर पाना मुश्किल हैं। छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों से अनुरोध है कि वो अपनी रचनाओं से इस अधूरेपन को दूर करें।

साहित्यकार और लेखक गिरीश पंकज ने कहा कि अमेरिका दौरे के दौरान उनकी कही गई कविताओं अभी भी लोगों के जेहन में है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के साथ ही देश-विदेश में छत्तीसगढ़ी साहित्य और काव्य को पहुंचाया।
सूफी गायक मदन चौहान ने कहा कि उनका जाना अपूरणीय क्षति है। वो कहते थे कि महाराज चिंता मत कर टाइगर अभी जिंदा है।

‘राम भक्त जयघोष करो मंदिर बनने वाला है…
छत्तीसगढ़ के गौरव, विख्यात हास्य कवि और व्यंग्यकार पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे की कवितायें न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि सात समुंदर पार विदेशों में भी गूंजती थी। अमेरिका दौरे के दौरान कही गई उनकी कवितायें खास कर… ‘दु के पहाड़ा ल चार बार पढ़,एला कहिथे छत्तीसगढ़…, ‘टाइगर अभी जिंदा है…’, अभी भी लोगों की जुबां पर है। बड़ों से लेकर बच्चों की जुबां पर भी ये कवितायें रटी रटाई है। हर जगह ये कवितायें अक्सर सुनने को मिलती हैं। अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समय भी उन्होंने एक कविता ‘पाँच अगस्त का सूरज राघव को लाने वाला है,राम भक्त जयघोष करो मंदिर बनने वाला है…’ लिखी थी।

साल 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। वे छत्तीसगढ़ी भाषा, छत्तीसगढ़ी शैली, छत्तीसगढ़ी हास्य साहित्य के अग्रणी स्तंभ थे। उन्होंने पाँच पुस्तकें लिखीं । अपनी कविताओं से देश–विदेश के मंचों और टीवी शो पर लोगों को खूब गुदगुदाया। अपने विलक्षण हास्य, तीक्ष्ण व्यंग्य और अनूठी रचनात्मकता के माध्यम से डॉ. दुबे ने न केवल देश-विदेश के मंचों को गौरवान्वित किया, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। जीवनपर्यंत उन्होंने समाज को हँसी का उजास दिया।

8 जनवरी 1953 को बेमेतरा (तत्कालीन दुर्ग) में उनका जन्म हुआ था। वे मूलतः एक आयुर्वेदिक डॉक्टर थे, पर हास्य और व्यंग्य कविताओं के माध्यम से उन्होंने अपनी एक अलग खास पहचान बनाई थी। हास्य एवं व्यंग्य साहित्य में उनकी एक अनूठी पकड़ थी। उनकी विशेण शैली ने छत्तीसगढ़ी भाषा को ऊंचाई दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ी बोली, क्षेत्रीय भाषा को देश-विदेश में पहचान दिलाई। साहित्यिक सेवा के साथ ही डॉक्टरी पेशे में भी उन्होंने महत्वपू्र्ण योगदान दिया।

उनकी कवितायें कविताएं गुदगुदाती तो थी हीं लोगों को अपने भीतर झाँकने तक को मजबूर कर देती थीं। उनका फुल
आत्मविश्वास,भावपूर्ण प्रस्तुति शैली और क्षेत्रीय शब्दावली श्रोताओं को बाँध बांधे रखती थी। देश -विदेश में उनकी कवितायें देखी और सुनी जाती हैं। दूरदर्शन समेत लोकल चैनलों ने भी उनकी कविताओं को घर-घर पहुँचाया। इस वजह से उन्हें

साल 2008 में ‘काका हाथरसी हास्य रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

साल 2018 में उड़ी थी मौत की झूठी खबर

साल 2018 में राजस्थान के कवि जिनका नाम भी सुरेंद्र दुबे ही था। जब उनका निधन हुआ तो उस समय इंटरनेट पर छत्तीसगढ़ के सुरेंद्र दुबे के मौत की खबर तेजी से फैल गई। इस घटना को सुरेंद्र दुबे ने एक कविता बनाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुनाकर लोगों को खूब लोट-पोट करते रहे।

सम्मान और पुरस्कार
साल 2008 में ‘काका हाथरसी हास्य रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित
साल 2010 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री सम्मान
वर्ष 2012 में पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान, अट्टहास सम्मान
संयुक्त राज्य अमेरिका में लीडिंग पोएट ऑफ इंडिया सम्मान
अमेरिका के वाशिंगटन में हास्य शिरोमणि सम्मान 2019 से सम्मानित
उनकी रचनाओं पर देश के तीन विश्वविद्यालयों ने पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की है।
हास्य-व्यंग्य साहित्य की पांच पुस्तकें लिखीं
साहित्यिक योगदान के लिये देश-विदेश में सम्मानित

बता दें कि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का गुरुवार को रायपुर के एसीआई अस्पताल में हार्ट अटैक से निधन हो गया। उन्हें शाम साढ़े चार बजे के आसपास उन्होंने अंतिम सांस ली।

कुछ प्रमुख कवितायें…

दु के पहाड़ा ल चार बार पढ़,
आमटहा भाटा ला
खा के मुनगा ल चिचोर,
राजिम में नहा के
डोंगरगढ़ म चढ़,
एला कहिथे
छत्तीसगढ़ ।।

‘मोदी जी कहते हैं काला धन जब्त हो’

‘पाँच अगस्त का सूरज राघव को लाने वाला है,राम भक्त जयघोष करो मंदिर बनने वाला है…’

अपनी मौत की अफवाह पर कविता लिखी-
ये थीं मौत की झूठी खबर पर लिखी खुद सुरेंद्र दुबे की कविता की पंक्तियां
मेरे दरवाजे पर लोग आ गए
यह कहते हुए की दुबे जी निपट गे भैया
बहुत हंसात रिहीस..
मैं निकला बोला- अरे चुप यह हास्य का कोकड़ा है, ठहाके का परिंदा है
टेंशन में मत रहना बाबू टाइगर अभी जिंदा है.
मेरी पत्नी को एक आदमी ने फोन किया
वो बोला- दुबे जी निपट गे,
मेरी पत्नी बोली ऐसे हमारे भाग्य कहां है
रात को आए हैं पनीर खाए हैं
पिज़्ज़ा उनका पसंदीदा है
टेंशन में तो मैं हूं कि टाइगर अभी जिंदा है.
एक आदमी उदास दिखा मैंने पूछा तो बोला मरघट की लकड़ी वाला हूं
बोला वहां की लकड़ी वापस नहीं हो सकती आपको तो मरना पड़ेगा
नहीं तो मेरे 1600 रुपए का नुकसान हो जाएगा
मैंने कहा- अरे टेंशन में मत रह पगले टाइगर अभी जिंदा है.

कोरोना के “शोले” से बचकर..
कोरोना की “दिवार” गिराकर..
कोरोना की “ज़ंजीर” तोड़कर..
वो “मुक़द्दर का सिकंदर”..
फिर “शहंशाह” बनेगा ।।

– कवि डॉक्टर सुरेंद्र दुबे

admin

Vedant Bhoomi is a trusted name in the real estate industry, dedicated to crafting sustainable, elegant, and high-quality living spaces. With a deep understanding of design, nature, and community living, we aim to create projects that inspire a harmonious and fulfilling lifestyle.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button