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गंभीर-अगरकर प्रभाव : आगे से सितारों को मर्जी से मैच चुनने की अनुमति नहीं देगा बीसीसीआई

नयी दिल्ली/लंदन. गौतम गंभीर हमेशा से भारतीय क्रिकेट में मेगा स्टार संस्कृति के खिलाफ रहे हैं लेकिन इंग्लैंड दौरे पर मोहम्मद सिराज के लगातार अच्छे प्रदर्शन से भारत के मुख्य कोच को अब अपने हिसाब से ‘टीम कल्चर’ बनाने का मौका मिल गया है. इंग्लैंड से श्रृंखला 2 . 2 से ड्रॉ कराने के बाद गंभीर और चयन समिति के प्रमुख अजित अगरकर टीम में जरूर ऐसा माहौल बनाना चाहेंगे जिसमें सभी को बराबर माना जाये .समझा जाता है कि चयन समिति, गंभीर और भारतीय क्रिकेट के आला अधिकारी कार्यभार प्रबंधन के नाम पर खिलाड़ियों के मर्जी से मैच और श्रृंखला खेलने के चलन पर रोक लगाने को लेकर एकमत हैं .

बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा ,” इस पर बात हुई है और केंद्रीय अनुबंध प्राप्त खिलाड़ियों को बता दिया गया है , खास तौर पर उनको जो सभी प्रारूपों में नियमित खेलते हैं कि भविष्य में अपनी मर्जी से मैच चुनने का कल्चर नहीं चलेगा .’ उन्होंने कहा ,” इसके यह मायने नहीं हैं कि कार्यभार प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया जायेगा . तेज गेंदबाजों का कार्यभार प्रबंधन जरूरी है लेकिन इसकी आड़ में खिलाड़ी अहम मैचों से बाहर नहीं रह सकते .” इंग्लैंड के खिलाफ मोहम्मद सिराज ने पांच टेस्ट में 185 . 3 ओवर डाले जिसके अलावा नेट्स पर गेंदबाजी और फील्डिंग अलग . उन्होंने फिटनेस के नये मानदंड कायम किये . सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और आकाश दीप के प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि बड़े से बड़े सितारे भी खेल से बढकर नहीं हैं .

इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने भी कई दिक्कतों के बावजूद चौथे टेस्ट तक काफी लंबे स्पैल डाले . इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या कार्यभार प्रबंधन को अपनी सहूलियत के हिसाब से ढाल बनाया जाता है . भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने ‘इंडिया टुडे’ से कहा ,” जब आप देश के लिये खेल रहे हैं तो दर्द भूल जाइये . क्या आपको लगता है कि सीमा पर जवान ठंड की शिकायत करेंगे . ऋषभ पंत ने आपको क्या दिखाया . वह फ्रेक्चर के बावजूद बल्लेबाजी के लिये आया . खिलाड़ियों से इसी की अपेक्षा की जाती है . भारत के लिये खेलना गर्व की बात है .”

उन्होंने कहा ,” आप 140 करोड़ लोगों के प्रतिनिधि हैं और यही हमने मोहम्मद सिराज में देखा . सिराज ने कार्यभार की तमाम बातों को धता बताते हुए दिलेरी से गेंदबाजी की . लगातार पांच टेस्ट में सात आठ स्पैल डाले क्योंकि देश को इसकी अपेक्षा थी . उम्मीद है कि यह कार्यभार शब्द भारतीय क्रिकेट के शब्दकोष से गायब हो जायेगा .” यह भी कहा जा सकता है कि जसप्रीत बुमराह का पांचों टेस्ट में नहीं खेलने का फैसला बीसीसीआई को रास नहीं आया है . इससे बेंगलुरू के उत्कृष्टता केंद्र में काम कर रही खेल विज्ञान टीम पर भी ऊंगली उठी है .

उम्मीद है कि कार्यभार प्रबंधन भारतीय क्रिकेट के शब्दकोश से गायब हो जाएगा: गावस्कर

भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने उम्मीद व्यक्त की कि मोहम्मद सिराज के इंग्लैंड के खिलाफ पांंच टेस्ट मैच की श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन के बाद कार्यभार प्रबंधन जैसा शब्द भारतीय क्रिकेट के शब्दकोष से हमेशा के लिए गायब हो जाएगा. सिराज ने इंग्लैंड के खिलाफ सभी पांच टेस्ट खेले और कुल 185.3 ओवर फेंके, जिसमें उन्होंने 23 विकेट लिए. दूसरी तरफ मुख्य तेज गेंदबाज. जसप्रीत बुमराह केवल तीन मैचों के लिए ही उपलब्ध रहे और अपने कार्यभार प्रबंधन के तहत ओवल में खेले गए पांचवें टेस्ट मैच में भी नहीं खेल पाए.

गावस्कर ने स्पष्ट किया कि वह बुमराह की आलोचना नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह किसी और चीज से ज्यादा चोट प्रबंधन का मामला था. गावस्कर ने ‘इंडिया टुडे’ से कहा, ”जब आप अपने देश के लिए खेल रहे हों, तो दर्द और तकलीफ.ों को भूल जाइए. क्या आपको लगता है कि सीमा पर जवान ठंड की शिकायत करते होंगे. ऋषभ पंत ने आपको क्या दिखाया? वह पांव में फ्रैक्चर के बावजूद बल्लेबाज.ी करने आए थे. आप खिलाड़ियों से यही उम्मीद करते हैं. भारत के लिए क्रिकेट खेलना सम्मान की बात है.”

उन्होंने कहा, ”आप 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और यही हमने मोहम्मद सिराज में देखा. मुझे लगता है कि सिराज ने पूरे दिल से गेंदबाजी की और उन्होंने काम के बोझ जैसे शब्द को हमेशा के लिए खत्म कर दिया. पांच टेस्ट मैचों में उन्होंने लगातार 7-8 ओवर गेंदबाजी की क्योंकि कप्तान उनसे यही उम्मीद कर रहा था और देश को भी उनसे यही उम्मीद थी.” गावस्कर ने कहा कि कार्यभार प्रबंधन सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध टीम के चयन में बाधा नहीं बन सकता. उन्होंने कहा, ”यदि आप उन लोगों के आगे झुक जाएंगे जो कार्यभार के बारे में बात कर रहे हैं, तो देश के लिए मैदान पर कभी भी आपके सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी नहीं होंगे. मुझे उम्मीद है कि अब कार्यभार प्रबंधन जैसा शब्द भारतीय क्रिकेट के शब्दकोष से हमेशा के लिए गायब हो जाएगा. कार्यभार सिर्फ मानसिक स्थिति है शारीरिक नहीं.”

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