कुत्ते सबसे सुंदर, सौम्य प्राणी हैं, वे क्रूर बर्ताव के हकदार नहीं: प्रियंका
आवारा कुत्तों पर न्यायालय का निर्देश मानवीय, विज्ञान-सर्मिथत नीति से एक कदम पीछे: राहुल
नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने मंगलवार को कहा कि शहर के सभी आवारा कुत्तों को कुछ ही हफ्तों में आश्रय स्थलों में भेजने का कदम उनके साथ ”बेहद अमानवीय” व्यवहार होगा. प्रियंका गांधी ने कहा कि कुत्ते सबसे सुंदर और सौम्य प्राणी हैं तथा वे इस तरह ‘क्रूर बर्ताव’के हकदार नहीं हैं.
उनकी यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अधिकारियों को सड़कों से सभी आवारा पशुओं को ‘यथाशीघ्र’ आश्रय स्थलों में स्थायी रूप से स्थानांतरित करने का निर्देश दिए जाने के एक दिन बाद आई है. प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”शहर के सभी आवारा कुत्तों को कुछ ही हफ्तों में आश्रय स्थलों पर भेजना उनके साथ बेहद अमानवीय व्यवहार होगा. उन्हें रखने के लिए पर्याप्त आश्रय स्थल भी मौजूद नहीं हैं.” कांग्रेस महासचिव ने कहा कि शहरी परिवेश में पशुओं के साथ दुर्व्यवहार और क्रूरता की जाती है.
वायनाड से लोकसभा सदस्य प्रियंका गांधी ने कहा, ”स्थिति को संभालने का निश्चित रूप से एक बेहतर तरीका है. कोई ऐसा मानवीय तरीका खोजा जा सकता है, जिसमें इन निर्दोष जानवरों की देखभाल की जा सके और उन्हें सुरक्षित रखा जा सके.” प्रियंका गांधी ने कहा कि कुत्ते सबसे सुंदर और सौम्य प्राणी हैं, वे इस तरह के क्रूर बर्ताव के हकदार नहीं हैं. .
आवारा कुत्तों पर न्यायालय का निर्देश मानवीय, विज्ञान-सर्मिथत नीति से एक कदम पीछे: राहुल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) से सभी आवारा कुत्तों को हटाने का उच्चतम न्यायालय का निर्देश दशकों पुरानी मानवीय और विज्ञान-सर्मिथत नीति से एक कदम पीछे है. उन्होंने कहा कि ”पूरी तरह से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश क्रूर, अदूरदर्शी है और इसमें करुणा का अभाव है.”
उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी ने कहा, ”दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने का उच्चतम न्यायालय का निर्देश दशकों से चली आ रही मानवीय, विज्ञान-सर्मिथत नीति से एक कदम पीछे है.” विपक्ष के नेता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ये बेजुबान जीव कोई ”समस्या” नहीं हैं जिन्हें मिटाना पड़े.
गांधी ने कहा, ”आश्रय स्थल, बधियाकरण, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल बिना किसी क्रूरता के सड़कों को सुरक्षित रख सकते हैं. लेकिन उन्हें पूरी तरह से हटाना क्रूर, अदूरदर्शी है और जिसमें करुणा का अभाव है.” कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जन सुरक्षा और पशु कल्याण साथ-साथ हों.”
अदिवी शेष ने आवारा कुत्तों के संबंध में सीजेआई और दिल्ली की मुख्यमंत्री से पुर्निवचार की अपील की
तेलुगू अभिनेता अदिवी शेष ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर उनसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आवारा कुत्तों को बड़े पैमाने पर पकड़ने को लेकर दिए गए निर्देश पर पुर्निवचार करने की अपील की है.
”मेजर” फिल्म के अभिनेता शेष पशु प्रेमी हैं. उन्होंने कहा कि जिन कुत्तों का बधियाकरण और टीकाकरण करवा जा चुका है, उन्हें मौजूदा पशु कल्याण कानूनों के तहत उनके अपने क्षेत्रों में ही रहने दिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि आबादी नियंत्रण के लिए कुत्तों को बड़े पैमाने पर बंदी बनाने के बजाय कानूनी और मानवीय तरीकों को अपनाया जाना चाहिए.
जॉन अब्राहम ने सीजेआई को पत्र लिखकर आवारा कुत्तों के संबंध में जारी निर्देश की समीक्षा की मांग रखी
अभिनेता जॉन अब्राहम ने मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई को पत्र लिखकर दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) क्षेत्र से आवारा कुत्तों को हटाने के उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्देश की समीक्षा करने और उसमें संशोधन का आग्रह किया.
जॉन अब्राहम को ‘पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स’ (पेटा) इंडिया का पहला मानद निदेशक नियुक्त किया गया था. उन्होंने कहा कि कुत्ते आवारा नहीं हैं, बल्कि समुदाय का हिस्सा हैं और बहुत से लोग इनसे विशेष लगाव रखते हैं. अब्राहम ने कहा, ”मुझे उम्मीद है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि ये ‘आवारा’ नहीं, बल्कि समुदाय का हिस्सा हैं, जिनसे कई लोग विशेष लगाव रखते हैं और प्रेम करते हैं, खासकर दिल्ली के लोग….” अभिनेता ने कहा कि यह निर्देश पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 और इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत के पिछले फैसलों के खिलाफ है, जिनमें हमेशा ”व्यवस्थित नसबंदी कार्यक्रम” का समर्थन किया गया है.”
तृणमूल सांसद ने प्रधान न्यायाधीश को लिखा पत्र, आवारा कुत्तों से जुड़े फैसले पर रोक लगाने की अपील की
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद साकेत गोखले ने मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई को पत्र लिखकर दिल्ली में आवारा कुत्तों को सड़क से हटाने के उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर रोक लगाने की अपील की. शीर्ष अदालत के इस फैसले को लेकर खासकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है.
उन्होंने पत्र में कहा कि इस फैसले का परिणाम यह होगा कि दिल्ली के सभी आवारा कुत्ते ”बेहद अमानवीय परिस्थितियों में निश्चित मौत” के हवाले कर दिए जाएंगे. गोखले ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मैंने आज (मंगलवार) सुबह भारत के माननीय प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर दिल्ली में आवारा कुत्तों के संबंध में कल (सोमवार को) उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश पर रोक लगाने और एक बड़ी पीठ द्वारा आदेश की समीक्षा किए जाने की अपील की.” उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा का मुद्दा निश्चित रूप से चिंता का विषय है. गोखले ने कहा, “हालांकि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसे बिना किसी व्यापक परामर्श प्रक्रिया के न्यायपालिका के मनमाने आदेशों से सुलझाया जा सके. इसके अलावा, निहत्थे जानवरों पर बेतहाशा क्रूरता करना कभी भी समाधान नहीं हो सकता.”

