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बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण: तृणमूल सांसद गोखले बोले, लोगों के नागरिकता गंवाने का खतरा

नयी दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस सांसद साकेत गोखले ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि बिहार में जारी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सिर्फ मतदाता के तौर पर लोगों के नाम सूची से हटाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे उनके नागरिकता गंवाने का भी खतरा है.

गोखले ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में लोकसभा में गृह मंत्रालय के एक जवाब का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने ऐसे दस्तावेज की सूची नहीं दी है जो नागरिकता साबित कर सके. गोखले ने लिखा, ”हाल ही में संसद में मोदी सरकार ने यह खुलासा करने से इनकार कर दिया कि कौन सा दस्तावेज ‘नागरिकता का प्रमाण’ है. हालांकि, इसने यह कहा कि आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस आदि नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं.”

उन्होंने कहा, ”इसलिए, वर्तमान कानूनों के तहत नागरिकता स्थापित करने का केवल एक ही तरीका है: यदि आपकी जन्मतिथि 1 जुलाई 1987 से पहले है, तो आपको यह साबित करना होगा कि आपका जन्म भारत में हुआ था; यदि आपकी जन्मतिथि 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच है, तो आपको यह साबित करना होगा कि आपका और आपके किसी एक माता-पिता का जन्म भारत में हुआ था; यदि आपकी जन्मतिथि 3 दिसंबर 2004 के बाद है, तो आपको यह साबित करना होगा कि आपका और माता-पिता दोनों का जन्म भारत में हुआ था.” तृणमूल सांसद ने कहा कि जन्मतिथि और जन्मस्थान साबित करने का मुख्य दस्तावेज जन्म प्रमाणपत्र है.

उन्होंने कहा, ”अब यहां समस्या यह है कि 2022 तक भारत में केवल 75 प्रतिशत जन्म अस्पतालों में हुए (और इसलिए स्वत? पंजीकृत हो गए).” उन्होंने कहा, ”वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार केवल 82 प्रतिशत जन्म पंजीकृत थे जिसका मतलब यह है कि पिछले 10 वर्षों में जन्मे लगभग 20 प्रतिशत भारतीयों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है.” गोखले ने कहा, ”यदि वर्तमान में यह स्थिति है, तो कल्पना कीजिए अतीत में क्या हाल रहा होगा. जब न इंटरनेट था, न तकनीक और अस्पतालों में जन्म भी कम होते थे. यह कहना सही होगा कि लगभग 20-25 प्रतिशत भारतीयों के पास अपना जन्म प्रमाणपत्र नहीं है. अगर इसमें माता-पिता के प्रमाणपत्र भी जोड़ दिए जाएं, तो यह संख्या कई गुना बढ़ जाएगी.” उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग सीमित दस्तावेज को ही स्वीकार कर ”जन्म संबंधी विवरण” के आधार पर नागरिकता साबित करने की मांग कर रहा है.

गोखले ने आरोप लगाया, ”इसका मतलब है कि तकनीकी रूप से 25 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ‘नागरिकता साबित करने में विफल’ होने पर हटाए जा सकते हैं.” उन्होंने दावा किया, ”अगर मोदी सरकार अगले साल जनगणना के साथ राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करती है, तो 20-30 प्रतिशत भारतीयों को (अपने तथा माता-पिता के जन्म प्रमाणपत्र न होने पर) ‘ग.ैर-नागरिक’ करार दिया जा सकता है.” सांसद ने आगे कहा कि यदि आप अपने जन्म का प्रमाण और कई मामलों में अपने माता-पिता का भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो आपको मतदाता सूची से हटाया जा सकता है. मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद, चुनाव आयोग आपको ‘गैर-नागरिक’ के रूप में प्रस्तुत भी कर सकता है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ‘एसआईआर वोट चोरी’ प्रक्रिया ‘नागरिकता चोरी’ की पहली कड़ी है. यह केवल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मामला नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकता छिनने का खतरा भी शामिल है.

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