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राहुल गांधी के आरोप ने एसआईआर की जरूरत को रेखांकित किया : भाजपा

नयी दिल्ली. केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि विपक्षी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप लगा एक तरह से निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन किया है.

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भाजपा द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गांधी परिवार पर सत्ता के ‘लालच’ में कथित तौर पर रिश्वत देने, दबाव डालने और यहां तक कि उन मतपत्रों को नष्ट करने का आरोप लगाया जिनके बारे में माना जाता था कि वे कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ डाले गए थे. पार्टी ने गांधी परिवार पर चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया.

भाजपा ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त होने से तीन साल पहले ही मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का आरोप लगाया है. शेखावत ने कांग्रेस और गांधी परिवार को भाजपा के इस आरोप को लेकर कथित तौर पर चुप्पी साधने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यह चुप्पी अपने आप में सवाल खड़े करती है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”मैं कांग्रेस से फिर पूछता हूं कि उसने मतदाता सूची को कैसे प्रभावित किया और नागरिक बनने से पहले ही उन्हें मतदाता कैसे बना दिया गया. यह निश्चित रूप से भारतीय संप्रभुता को चुनौती देने और संवैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार करने के समान है.” राहुल गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन कर 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान कर्नाटक के एक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एक प्रस्तुति दी थी. इस बारे में पूछे जाने पर शेखावत ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने केवल एसआईआर की आवश्यकता को पुख्ता किया है.

भाजपा नेता ने कहा कि ऐसी अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए, लेकिन जब जांच होती है तो गांधी घड़ियाली आंसू बहाते हैं और इसका विरोध करते हैं. उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. शेखावत ने दावा किया, ”उन्होंने (गांधी ने) एसआईआर के समर्थन में बात की है और अपने बयान से इसकी आवश्यकता पर बल दिया है.” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता का झूठा विमर्श गढ़ने का इतिहास है चाहे वह र्सिजकल स्ट्राइक हो या भारत में कोविड टीकों का विकास, या फिर राष्ट्रीय गौरव और एकता की आवश्यकता के समय भारत विरोधी ताकतों को मजबूत करना. शेखावत ने कहा कि लोगों ने बार-बार उनके झूठे बयानों का जवाब वोटों से दिया है और अब वह राजनीति के हाशिये पर हैं.

उन्होंने तत्कालीन मीडिया की खबरों और कुछ मामलों में आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 1951-52 में पहले चुनाव होने और जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कांग्रेस नियमित रूप से चुनावी धांधली का सहारा लेती रही है.
शेखावत ने दावा किया कि कांग्रेस नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अबुल कलाम आजाद को 1972 में रामपुर लोकसभा क्षेत्र से तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार द्वारा प्राप्त मतों के हस्तांतरण के कारण जीत मिली थी, जबकि बी आर अंबेडकर को अपनी सीट से हार का सामना करना पड़ा था, क्योंकि प्रशासन ने 73,000 से अधिक मतों को खारिज कर दिया था.

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने अमेठी में कई मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने चुनाव लड़ा था, क्योंकि चुनावी गड़बड़ियां सिद्ध हो चुकी थीं. शेखावत ने इस संदर्भ में 1975 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी की 1971 की चुनावी जीत को कदाचार के कारण रद्द किये जाने का उदाहरण दिया. उक्त चुनाव रद्द किये जाने के बाद इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया था.

उन्होंने दावा किया कि मतदान में धांधली आम बात है और कुछ राज्यों में रिश्वतखोरी और अन्य अनियमितताओं के कारण आर्थिक गतिविधियां फूल-फल रही हैं. भाजपा नेता ने दावा किया कि नेहरू के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि 1951 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार अधिकांश सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हों गये क्योंकि प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों, विशेषकर प्रजा परिषद के उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गए थे.

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