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कांग्रेस ने सरकार से निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण पर कानून बनाने की मांग की

नयी दिल्ली. शिक्षा पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में सिफारिश के बाद कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि सरकार को निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जातियों (एससी) को 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को 7.5 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए संसद में एक नया कानून लाना चाहिए. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि गेंद अब सरकार के पाले में है और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के लिए एससी, एसटी और ओबीसी की मांग को नजरअंदाज करना संभव नहीं है.

उन्होंने एक बयान में कहा, ”दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली शिक्षा संबंधी संसद की स्थायी समिति ने आज संसद में एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण की वकालत की गई है.” रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए रमेश ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(5), जिसे 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने 93वें संशोधन के माध्यम से जोड़ा था, सरकार को निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी के छात्रों के लिए आरक्षण की अनुमति देता है.

उन्होंने कहा कि मई 2014 में ‘प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट’ बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 15(5) की वैधता को बरकरार रखा था, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में भी आरक्षण की अनुमति है.
कांग्रेस नेता ने कहा, ”हालांकि, वर्तमान में संसद की ओर से कोई कानून पारित नहीं किया गया है, जो अनुच्छेद 15(5) को लागू करता हो और निजी उच्च शिक्षा संस्थानों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के छात्रों के लिए आरक्षण देना अनिवार्य करता हो.” उन्होंने कहा, ”निजी शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी का वर्तमान प्रतिनिधित्व बेहद कम है.

समिति ने केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त तीन निजी प्रतिष्ठित संस्थानों (आईओई) में छात्रों की संख्या का अध्ययन किया, जिसमें 0.89 प्रतिशत छात्र अनुसूचित जाति, 0.53 प्रतिशत छात्र अनुसूचित जनजाति और 11.16 प्रतिशत छात्र अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं.” रमेश ने कहा कि शिक्षा पर संसद की स्थायी समिति ने सर्वसम्मति से सिफारिश की है कि संसद अनुसूचित जाति के लिए 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण तथा अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाला कानून पारित करे.

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