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दार्जिलिंग पहाड़ियों में भारी बारिश से बड़े पैमाने पर भूस्खलन में 20 की मौत, दौरा करेंगी ममता

दार्जिलिंग. पश्चिम बंगाल के मिरिक और दार्जिलिंग पहाड़ियों में रविवार को लगातार बारिश के कारण हुए भारी भूस्खलन में कई बच्चों सहित कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन के कारण कई घर बह गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, दूरदराज के कई गांवों का संपर्क टूट गया तथा सैकड़ों पर्यटक फंस गए.

एनडीआरएफ और जिला प्रशासन द्वारा संकलित रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों – सरसली, जसबीरगांव, मिरिक बस्ती, धार गांव (मेची), नागराकाटा और मिरिक झील क्षेत्र से लोगों के मारे जाने की खबर है. उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने जान-माल के नुकसान को दुखद बताते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि स्थिति “चिंताजनक” है. उन्होंने शाम को कहा, “अभी तक मृतकों की संख्या 20 है. यह संख्या ब­ढ़ने की आशंका है. मैं इलाके के लिए रवाना हो रहा हूं.” एनडीआरएफ के बयान के अनुसार, भूस्खलन से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र मिरिक में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई है और सात घायलों को क्षेत्र से बचा लिया गया है.
दार्जिलिंग में सात लोगों की मौत हो गई और पुलिस, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया टीमों की मदद से बचाव अभियान जारी है.

दार्जिलिंग उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) रिचर्ड लेप्चा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “कल रात से हो रही भारी बारिश के कारण दार्जिलिंग उपखंड में हुए भीषण भूस्खलन में सात लोगों की मौत हो गई है. बचाव और राहत कार्य जारी है.” दुर्गा पूजा और पूजा के बाद के उत्सवों का आनंद लेने के लिए दार्जिलिंग की पहाड़ियों में आए सैकड़ों पर्यटक भारी वर्षा के कारण हुए भूस्खलन के कारण फंस गए हैं.

उनमें से कई, जिनमें कोलकाता और बंगाल के अन्य हिस्सों से आए परिवार और समूह शामिल थे, मिरिक, घूम और लेपचाजगत जैसे लोकप्रिय स्थानों पर जा रहे थे. पहाड़ियों पर शनिवार से ही बारिश हो रही थी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की, लेकिन राशि का उल्लेख नहीं किया और कहा कि वह छह अक्टूबर को उत्तर बंगाल का दौरा करेंगी और क्षेत्र की स्थिति का आकलन करेंगी, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक भी प्रभावित हुए हैं. उन्होंने मरने वालों का कोई आंकड़ा नहीं दिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मौतों पर शोक व्यक्त किया और कहा कि भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

नागराकाटा के धार गांव में मलबे से कम से कम 40 लोगों को बचाया गया जहां भारी भूस्खलन के कारण कई घर ध्वस्त हो गए.
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके पास जानकारी है कि इस आपदा में 21 लोगों की जान चली गई.
भूस्खलन के कारण मिरिक-सुखियापोखरी सड़क सहित प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित हो गया जबकि कई पहाड़ी बस्तियों की संचार लाइनें टूट गईं. टीवी9 बांग्ला समाचार चैनल से फोन पर बात करते हुए बनर्जी ने स्थिति को “गंभीर” बताया.

उन्होंने कहा, “भूटान में लगातार बारिश के कारण पानी उत्तर बंगाल में बह गया है. यह आपदा दुर्भाग्यपूर्ण है – प्राकृतिक आपदाएं हमारे नियंत्रण से बाहर हैं. हम बहुत दुखी हैं. मैंने मुख्य सचिव के साथ पांच प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ डिजिटल माध्यम से बैठकें कीं. मैं सुबह छह बजे से स्थिति पर नजर रख रही हूं.” बनर्जी के अनुसार, केवल 12 घंटों में 300 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई, जिससे कम से कम सात जगहों पर भयंकर बा­ढ़ और भूस्खलन हुआ. उन्होंने इस स्थिति की तुलना पिछले महीने त्योहारों के मौसम में कोलकाता में आई भीषण बा­ढ़ से की.

उन्होंने कहा, “12 घंटे से लगातार भारी बारिश हो रही है. सात जगहों पर भूस्खलन हुआ है. मैं कड़ी नजर रख रही हूं और उम्मीद है कि सोमवार अपराह्न तीन बजे तक वहां पहुंच जाऊंगी.” भूस्खलन और सड़क मार्ग पर अवरोधों के कारण पूरे क्षेत्र में हजारों पर्यटक फंसे हुए हैं. मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उन्हें सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था करेगी और पर्यटकों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और वहां से निकलने की जल्दबाजी न करें.

उन्होंने कहा, “कई पर्यटक फंसे हुए हैं. मैं उनसे अनुरोध करती हूं कि वे हड़बड़ी न करें. कृपया जहां हैं वहीं रहें. होटल वालों को उनसे ज्यादा पैसे नहीं लेने चाहिए. उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा.” बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि आपदा में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी मुआवजा और उनके एक सदस्य को रोजगार मिलेगा. हालांकि उन्होंने राशि का जिक्र नहीं किया.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारी और लगातार हो रही बारिश के कारण बचाव कार्य में भारी बाधा आई है. उन्होंने कहा, “यह इलाका फिसलन भरा है और कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं. नुकसान का आकलन अब भी किया जा रहा है. इन ढलानों पर मशीनों के लिए काम करना बेहद मुश्किल हो रहा है.” मिरिक में कई परिवारों को एहतियाती उपाय के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि स्थानीय गैर सरकारी संगठनों और जिला प्रशासन के समन्वय से अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “दार्जिलिंग में पुल दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि से बहुत दु:ख हुआ है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं. भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है. हम प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग सहित उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर तक अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है. साथ ही, मिट्टी की नाजुक स्थिति के कारण और अधिक भूस्खलन और सड़कों पर अवरोध पैदा होने की चेतावनी दी है. एनडीआरएफ के अनुसार, दार्जिलिंग जिले और उत्तरी सिक्किम में सड़क संपर्क गंभीर रूप से बाधित है और सिलीगुड़ी को मिरिक-दार्जिलिंग मार्ग से जोड़ने वाला एक लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे इस क्षेत्र तक पहुंच बाधित हो गई है.

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