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जीएसटी बैठक: विपक्ष शासित राज्यों ने राजस्व बंटवारे के फॉर्मूले को बदलने की मांग की

चंडीगढ़. विपक्ष शासित राज्यों ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत अपने राजस्व को बचाने के लिए राजस्व बंटवारे के फॉर्मूले को बदलने के लिए दबाव बनाना शुरू किया है. जीएसटी लागू होने के कारण राज्यों के राजस्व की क्षतिपूर्ति की व्यवस्था इस महीने खत्म हो रही है.

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री टी एस सिंह देव ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच जीएसटी से राजस्व को समान रूप से विभाजित करने के मौजूदा फॉर्मूले को बदला जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि राज्यों को 70-80 प्रतिशत का बड़ा हिस्सा दिया जाना चाहिए.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में देव ने कहा कि उनके राज्य को जीएसटी व्यवस्था के तहत राजस्व का भारी नुकसान हुआ है. खासतौर से खनन और विनिर्माण आधारित राज्यों को जीएसटी के तहत सबसे अधिक नुकसान हुआ है.

सीतारमण की अध्यक्षता में और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की जीएसटी परिषद की 47वीं बैठक मंगलवार को यहां शुरू हुई. बैठक 29 जून तक चलेगी. देव कोविड-19 संक्रमण के चलते बैठक में शामिल नहीं हो सके. उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘… हम 14 प्रतिशत संरक्षित राजस्व प्रावधान को जारी रखने का प्रस्ताव जीएसटी परिषद में पेश कर रहे हैं. यदि संरक्षित राजस्व प्रावधान जारी नहीं रखा जाता है, तो सीजीएसटी और एसजीएसटी के लिए 50-50 प्रतिशत के फॉर्मूले को एसजीएसटी 80-70% और सीजीएसटी 20-30% में बदल दिया जाना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होता है तो वर्तमान मुआवजा व्यवस्था अगले पांच वर्षों तक जारी रहनी चाहिए.

इस समय जीएसटी से एकत्रित राजस्व को केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से साझा किया जाता है. उपकर से संग्रह का उपयोग जीएसटी कार्यान्वयन के कारण राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई के लिए किया जाता है. सीतारमण को लिखे पत्र में, देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ को पिछले वित्त वर्ष में 4,127 करोड़ रुपये, 2020-21 में 3,620 करोड़ रुपये, 2019-20 में 3,176 करोड़ रुपये और 2018-19 में 2,786 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ है.

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