जैसलमेर बस हादसे में मृतकों की संख्या 21 हुई, 14 घायलों का इलाज जारी
जोधपुर. राजस्थान में जैसलमेर बस हादसे में मृतकों की संख्या बुधवार को बढ़कर 21 हो गई . अधिकारियों ने यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि झुलसे हुए 14 लोगों का अब भी यहां इलाज चल रहा है जिनमें से चार जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं. अधिकारियों के अनुसार हादसे में झुलसे आठ साल के बच्चे की जोधपुर के एमजी अस्पताल में मौत हो गई. अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि बच्चे की आज इलाज के दौरान मौत हो गई. अधिकारी ने कहा, ”चार लोग जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं.”
मंगलवार को दोपहर में जोधपुर जा रही एक निजी बस में जैसलमेर से रवाना होने के बमुश्किल दस मिनट बाद आग लग गई. देखते ही देखते बस आग का गोला बन गई और 19 यात्री जिंदा जल गए और 16 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए. गंभीर रूप से घायलों में से एक ने मंगलवार रात अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया. अब जोधपुर में 14 लोगों का इलाज चल रहा है. इस बीच, शवों की पहचान के लिए मृतकों के परिवार के सदस्यों से डीएनए नमूने लिए गए. एक डॉक्टर ने कहा कि पहचान के बाद, शव परिवार के सदस्यों को सौंप दिए जाएंगे.
इस बीच, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने सवाल उठाया कि सैन्य हेलीकॉप्टर उपलब्ध होने के बावजूद गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के लिए हवाई मार्ग से क्यों नहीं पहुंचाया गया. उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया. बेनीवाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री शर्मा पूछना चाहता हूं कि कल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ की धर्मपत्नी को बीमार होने पर जब आप उन्हें पाली से जयपुर हेलीकॉप्टर में ला सकते हैं तो आज जैसलमेर के निकट बस में हुई भीषण आगजनी में गंभीर रूप से झुलसे हुए नागरिकों को ‘एयरलिफ्ट’ करके जोधपुर क्यों नहीं लेकर आए?’ बेनीवाल ने लिखा,”जैसलमेर में तो सेना के हेलीकॉप्टर/विमान भी थे, आप केंद्र से एवं सैन्य अधिकारियों से बात करके तत्काल झुलसे हुए नागरिकों को हवाई मार्ग से जोधपुर या जयपुर लाते ताकि उनका समय पर उपचार शुरू होता.”
मुख्यमंत्री कल रात हवाई मार्ग से जैसलमेर पहुंचे और दुर्घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने अधिकारियों से बात की और उन्हें आवश्यक निर्देश दिए. बाद में, उन्होंने जोधपुर जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. जैसलमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कैलाश दान ने कहा कि आग लगने के कारण बस का गेट यानी दरवाजा बंद हो गया, जिससे यात्री बाहर नहीं निकल सके.
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”ज्यादातर शव बस के गैलरी में मिले, जिससे पता चलता है कि लोगों ने भागने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा जाम होने के कारण वे बाहर नहीं निकल पाए और असमय ही काल-कवलित हो गए.” इस बस में आग सेना के युद्ध स्मारक के पास लगी. वहां मौजूदा सेना के जवान तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव अभियान में शामिल हो गए. स्थानीय लोग एवं राहगीर भी मदद के लिए आगे आए. पास से गुजर रहे एक टैंकर से भी बस की आग बुझाने का प्रयास किया गया.
बस दरवाजा जोर लगाकर तोड़ना पड़ा. आग लगने के बाद कुछ यात्री बस की खिड़की तोड़कर बाहर कूदे और अपनी जान बचाई.
जैसलमेर के जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने बताया कि बस से 19 जले हुए शव बरामद किए गए और 16 गंभीर रूप से घायलों को जोधपुर के अस्पताल ले जाया गया. इनमें से एक की बीच रास्ते में मौत हो गई. उन्होंने कहा,”शवों को डीएनए सैंपलिंग और पहचान के लिए जोधपुर भेजा गया है. फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (एफएसएल) द्वारा मिलान की पुष्टि के बाद उन्हें परिवारों को सौंप दिया जाएगा.” पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बस में कुल कितने लोग थे इसकी पुष्टि की जा रही है.
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कैलाश दान ने कहा,” हादसे में अभी तक किसी के लापता होने की सूचना नहीं मिली है. हम लोगों की संख्या की पुष्टि कर रहे हैं. बस के रवाना होने के स्थान से लेकर रास्ते से सीसीटीवी फुटेज एकत्र कर लिए गए हैं और उनकी जांच की जा रही है.” उन्होंने कहा कि एफएसएल की टीम कल रात से ही घटनास्थल का निरीक्षण कर रही हैं. उन्होंने कहा, ”शुरुआती संकेत बस में शॉर्ट र्सिकट की ओर इशारा कर रहे हैं, हालांकि बस में पटाखे होने जैसी अन्य आशंकाओं की भी जांच की जा रही है.” बचाव अधिकारियों ने कहा कि हादसे का शिकार हुई बस देखते ही देखते ”आग का गोला” बन गई और उसमें सवार लोगों को बचाव के लिए कुछ करने का ज्यादा समय नहीं मिला.
अधिकारियों के अनुसार हादसे का शिकार बस नई थी. उसका हाल में पंजीयन हुआ था और वह अपनी चौथी यात्रा पर निकली थी. यह दोपहर बाद लगभग तीन बजे जैसलमेर से रवाना हुई थी तथा रास्ते में और यात्रियों को लेने वाली थी. एक पुलिसकर्मी ने प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से कहा कि बस के पिछले हिस्से से तेज धमाका सुना गया जो संभवत: एसी कंप्रेसर से हुआ था. उन्होंने कहा कि डीजल, एसी गैस और फ.ाइबर-आधारित अंदरूनी हिस्सों के कारण लगी आग और भड़क गई.
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा, ”बस में सिर्फ एक दरवाजा था, जो जाम हो गया था. ज्यादातर यात्री बाहर नहीं निकल पाए. सेना ने जितने संभव थे, शव निकाले. कुछ शव इतने जल गए थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल है.” प्रारंभिक जांच से पता चला है कि बस में कोई आपातकालीन निकास नहीं था. आपात स्थिति में खिड़की के कांच को तोड़ने के लिए कोई हथौड़ा नहीं था और एक संकरा गलियारा था जिसमें यात्री फंस गए थे. जैसे ही तारों में आग लगी, स्वचालित दरवाजा-लॉक सिस्टम सक्रिय हो गया, जिससे बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया.
जानकारी के अनुसार, बस के अंदर कई शव एक-दूसरे के ऊपर थे. इस बीच हादसे का शिकार हुई बस के मालिक और चालक के खिलाफ आज जैसलमेर में एक प्राथमिकी दर्ज की गई. इस हादसे के बाद जयपुर में परिवहन (आरटीओ) अधिकारियों द्वारा निजी बसों की गहन जांच की गई. एक अधिकारी ने बताया कि आरटीओ दस्तों ने बसों के दस्तावेजों की जांच की और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की गई.
