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हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार का चंडीग­ढ़ में अंतिम संस्कार

चंडीग­ढ़. हरियाणा में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी वाई पूरण कुमार द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने के आठ दिन बाद बुधवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. इससे पहले कुमार के शव का आज पीजीआईएमईआर में पोस्टमार्टम किया गया. उनकी पत्नी ने मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई है ताकि ‘जल्द से जल्द मामले में न्याय हो सके.’ सेक्टर 25 स्थित श्मशान घाट पर भावुक दृश्य देखने को मिला, जहां शोक व्यक्त करने वाले लोग उनके पक्ष में नारे लगा रहे थे.
कुमार की पुलिस की वर्दी और पुलिस टोपी को कुछ समय के लिए उनके पार्थिव शरीर पर रखा गया, उसके बाद उनकी चिता को मुखाग्नि दी गई.

अंतिम संस्कार से पहले कुमार की पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार और उनकी दो बेटियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. पुलिस की एक टुकड़ी ने दिवंगत आईपीएस अधिकारी को बंदूकों की सलामी दी. अंतिम संस्कार में विभिन्न दलों के कुछ नेता, हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओ.पी. सिंह और हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सुमिता मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. श्रद्धांजलि स्वरूप पुष्पांजलि अर्पित की गई.

इससे पहले पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) में पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद पार्थिव शरीर को चंडीग­ढ़ स्थित उनकी पत्नी एवं आईएएस अधिकारी अमनीत कुमार के आवास पर ले जाया गया. बाद में, पार्थिव शरीर को वाहन में ले जाया गया, जिसके आगे की ओर पुलिस वर्दी में कुमार की तस्वीर लगाई गई थी. वाहन को सेक्टर 25 स्थित श्मशान घाट ले जाया गया, जो कुमार के सेक्टर 24 स्थित आवास से थोड़ी ही दूरी पर है. विभिन्न दलित संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. श्मशान घाट पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे.

मांगें को लेकर पोस्टमार्टम और दाह संस्कार पर कई दिनों तक विरोध दर्ज कराने के बाद, मृतक अधिकारी के परिवार ने अंतत: पोस्टमार्टम के लिए सहमति दे दी. उन्होंने सात अक्टूबर को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. दिवंगत वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी अमनीत कुमार ने एक बयान में कहा कि चंडीग­ढ़ पुलिस से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का आश्वासन मिलने तथा हरियाणा सरकार द्वारा कानून के अनुसार किसी भी दोषी अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताए जाने के मद्देनजर उन्होंने दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार के पोस्टमार्टम के लिए सहमति दे दी.

इसके बाद कुमार के परिवार की सहमति के बाद स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में उनका पोस्टमार्टम किया गया. पुलिस ने पहले एक बयान में बताया था कि पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सकों का एक बोर्ड गठित किया गया था, जिसमें वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की व्यवस्था की गई थी. दोपहर में जारी एक बयान में पीजीआईएमईआर ने कहा, “हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार का पोस्टमार्टम बुधवार को पीजीआईएमईआर में विधिवत गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा उचित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए किया गया.”

पीजीआईएमईआर के बयान में कहा गया है, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट (चंडीग­ढ़ पुलिस) विशेष अन्वेषण दल के जांच अधिकारी को सौंपी जाएगी… वाई पूरण कुमार के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया है.” अमनीत कुमार ने एक बयान में कहा, ”केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का आश्वासन मिलने तथा हरियाणा सरकार द्वारा कानून के अनुसार किसी भी दोषी अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताए जाने के मद्देनजर मैंने दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार के पोस्टमार्टम के लिए सहमति दे दी है.”

उन्होंने कहा, ”समय पर पोस्टमार्टम के साक्ष्यों के महत्व और न्याय के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए मैं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार गठित चिकित्सकों के बोर्ड, एक बैलिस्टिक विशेषज्ञ (अपराध को सुलझाने के लिए आग्नेयास्त्रों, गोला-बारूद और प्रक्षेप्य साक्ष्य के विश्लेषण में विशेषज्ञता रखने वाले विशेषज्ञ) की उपस्थिति में, एक मजिस्ट्रेट की निगरानी में और पूरी पारर्दिशता सुनिश्चित करने के लिए समूची प्रक्रिया की वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम कराने पर सहमत हूं.” हरियाणा की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने कहा, “मुझे न्यायपालिका और पुलिस अधिकारियों पर पूरा भरोसा है और मुझे पूरी उम्मीद है कि जांच पेशेवर, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से की जाएगी, ताकि कानून के अनुसार सच्चाई सामने आ सके.” उन्होंने कहा कि जांच दल को उनका पूरा सहयोग जारी रहेगा ताकि प्रक्रिया में तेजी आए और जल्द से जल्द “न्याय मिले”.

पुलिस महानिरीक्षक कुमार (52) ने सात अक्टूबर को यहां अपने आवास पर कथित तौर पर खुद को गोली मारकर जान दे दी थी. वह 2001 बैच के अधिकारी थे. कुमार द्वारा कथित तौर पर छोड़े गए आठ पन्नों के ‘अंतिम नोट’ में उन्होंने आठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों पर जाति-आधारित भेदभाव, लक्षित मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और अत्याचार का आरोप लगाया है.

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