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लेह में हिरासत में लिए गए छह नेता जमानत पर रिहा, निषेधाज्ञा वापस ली गई

लेह. पिछले महीने यहां हुई हिंसा के मामले में तीन सप्ताह की हिरासत के बाद कांग्रेस के एक पार्षद सहित छह नेताओं को जमानत पर रिहा किया गया. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. इसी से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने हिंसा की घटना के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत 24 सितंबर को लागू की गई सभी पाबंदियों को हटाने का आदेश जारी किया. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे.

अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय अदालत द्वारा जिन नेताओं को जमानत दी गयी उनमें ऊपरी लेह से कांग्रेस पार्षद स्टैनजिन फुंटसोग त्सेपाक, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (एलबीए) की महिला शाखा की अध्यक्ष कुन्जेस डोलमा, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम के इरफान बारी और लेह एपेक्स बॉडी से पद्मा स्टैनज.नि, जिग्मेट पलजोर और स्टैनज.नि चोस्पेल शामिल हैं. वे (जमानत पर रिहा सभी नेता) उन कई युवा नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने व्यापक हिंसा में कथित रूप से शामिल प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था. पुलिस ने 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया और उनमें से 35 को पिछले सप्ताह जमानत पर रिहा कर दिया गया.

कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के साथ मिलकर लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) सोनम वांगचुक सहित हिरासत में लिए गए सभी लोगों की रिहाई, न्यायिक जांच और चार मृत व्यक्तियों तथा गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग कर रही है ताकि केंद्र के साथ रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू किया जा सके. अपने आदेश में जिला मजिस्ट्रेट ने जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की.

लेह के डीएम रोमिल सिंह डोंक ने कहा, “…चूंकि, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने रिपोर्ट दी है कि अब शांति और सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन की कोई आशंका नहीं है और उन्होंने सिफारिश की है कि बीएनएसएस के धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंध को वापस लिया जाए. इसलिए, मैं 24 सितंबर को लगाए गए प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से वापस लेता हूं.” एलएबी और केडीए ने मंगलवार को कहा कि वे केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के समर्थन में पूरे लद्दाख में सुबह 10 बजे से दो घंटे का मौन शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे और उसके बाद उसी दिन शाम छह बजे से तीन घंटे का ब्लैकआउट करेंगे.
केडीए के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई ने यहां संवाददाताओं से कहा, “विरोध प्रदर्शन की तारीख जल्द ही सार्वजनिक कर दी जाएगी लेकिन विरोध प्रदर्शन कुछ ही दिनों में होगा.” समूहों ने केंद्र के साथ वार्ता पुन? शुरू करने के लिए पिछले महीने की हिंसा की न्यायिक जांच सहित अपनी शर्तें दोहराईं.

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