वन्यजीव अधिनियम में संशोधनों से हाथियों के संरक्षण में कोई मदद नहीं मिली: रमेश

नयी दिल्ली. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हाथियों की संख्या में गिरावट पर बृहस्पतिवार को चिंता जताई और दावा किया कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में तीन साल पहले किए गए संशोधनों से कोई मदद नहीं मिली है. पूर्व पर्यावरण मंत्री ने यह भी कहा कि धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिकी इतिहास में हाथी के विशिष्ट स्थान को देखते हुए उसे भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया गया था तथा इसकी सुरक्षा और संरक्षण सबका राष्ट्रीय कर्तव्य है.
देश में जंगली हाथियों की पहली बार डीएनए आधारित गणना के मुताबिक उनकी संख्या 22,446 है, जो 2017 के 27,312 से करीब 18 प्रतिशत कम है. अखिल भारतीय समकालिक हाथी अनुमान (एसएआईईई) 2025 के अनुसार, भारत में जंगली हाथियों की संख्या 18,255 से 26,645 के बीच होने का अनुमान है, जिसका औसत 22,446 है. सरकार ने 2021 में सर्वेक्षण शुरू होने के लगभग चार साल बाद बीते मंगलवार को लंबे समय से लंबित रिपोर्ट जारी की.
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”बहुत विलंब के बाद हाथी की गणना रिपोर्ट अभी जारी हुई है. कार्यप्रणाली और तकनीकों में बदलाव के कारण इसके परिणाम पिछले सर्वेक्षणों से तुलनीय नहीं हैं. फिर भी, इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि पिछले एक दशक में हाथियों की संख्या में गिरावट आई है. नई गणना के अनुसार, वर्तमान में हाथियों की संख्या 18,255 से 26,645 के बीच है.” उनका कहना है, ”यह समझना अधिक महत्वपूर्ण है कि हाथियों के सामने विलुप्ति का नहीं, बल्कि क्षय का संकट है. ये खतरे भूमि उपयोग में बदलाव, पारंपरिक आवासों के विनाश, संरक्षित क्षेत्रों के भीतर और बाहर हाथियों के आवागमन के मार्गों और गलियारों के विखंडन, खनन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दबाव, आक्रामक वनस्पति प्रजातियों और मनुष्यों के साथ संघर्ष से उत्पन्न होते हैं.”
रमेश ने दावा किया वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में तीन साल पहले किए गए संशोधनों से कोई मदद नहीं मिली है और उन्होंने संसद में इसके खिलाफ आवाज. उठाई थी. कांग्रेस नेता ने कहा, ”22 अक्टूबर, 2010 को हमारे धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक इतिहास में हाथी की विशिष्ट स्थिति को देखते हुए, उसे भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया गया था. इसकी सुरक्षा और संरक्षण हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है. हाथी वास्तव में हमारा साथी है.”