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भारत, चीन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत

नयी दिल्ली. भारत और चीन ने मौजूदा तंत्र का उपयोग करते हुए पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक और उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता की. कोर कमांडर स्तर की बैठक 25 अक्टूबर को वास्तविक नियंत्रण रेखा के भारतीय हिस्से में ‘मोल्डो-चुशूल’ बिंदु पर हुई. अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के बाद दोनों सेनाओं के बीच यह पहली ऐसी बातचीत थी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि वार्ता मैत्रीपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई.

मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने अक्टूबर 2024 में कोर कमांडर स्तर की 22वें दौर की बैठक के बाद से हुई प्रगति पर ध्यान दिया और इस बात पर सहमति जताई कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखा गया है. इसने कहा, ”दोनों पक्ष स्थिरता बनाए रखने के लिए सीमा पर किसी भी जमीनी मुद्दे को सुलझाने के लिए मौजूदा तंत्र का उपयोग जारी रखने पर सहमत हुए.” पिछले साल अक्टूबर में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चार साल से अधिक समय से जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने के बाद अपने संबंधों को सामान्य बनाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कई उपाय शुरू किए हैं.

डेमचोक और देपसांग के अंतिम दो टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया. गत 19 अगस्त को विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के लिए वांग की नयी दिल्ली यात्रा के बाद, भारत और चीन ने ”स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी” संबंधों के लिए कई उपायों की घोषणा की, जिनमें सीमा पर संयुक्त रूप से शांति बनाए रखना, सीमा व्यापार को पुन? खोलना और निवेश प्रवाह को ब­ढ़ावा देना शामिल था.

विदेश मंत्रालय ने कोर-कमांडर वार्ता पर कहा, ”गत 19 अगस्त को आयोजित विशेष प्रतिनिधियों की 24वें दौर की वार्ता के बाद से पश्चिमी क्षेत्र में ‘जनरल स्तरीय तंत्र’ की यह पहली बैठक थी.” कोर-कमांडर वार्ता पर एक चीनी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने चीन-भारत सीमा के पश्चिमी हिस्से के प्रबंधन पर सक्रिय और गहन संवाद किया. इसमें कहा गया कि दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निर्णय के अनुसार संचार और संवाद बनाए रखने का निर्णय लिया है.

चीन के रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया, ”वे दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति के मार्गदर्शन में सैन्य और राजनयिक माध्यमों से संचार और संवाद जारी रखने और चीन-भारत सीमा क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखने पर सहमत हुए.” हालांकि, दोनों पक्षों ने टकराव वाले स्थानों से अपने सैनिकों को हटा लिया है, लेकिन उन्होंने सीमा से अग्रिम पंक्ति के बलों को वापस नहीं बुलाया है.

वर्तमान में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों पक्षों में से प्रत्येक के लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं.
पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था और उसी वर्ष जून में गलवान घाटी में हुई एक घातक झड़प के परिणामस्वरूप दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था. भारत और चीन के बीच विभिन्न संवाद तंत्रों को पुनर्जीवित करने का निर्णय पिछले साल अक्टूबर में रूसी शहर कजान में मोदी और शी के बीच एक बैठक में लिया गया था.

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