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पुजारा ने भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लिया

कोई पछतावा नहीं, लंबे समय तक खेलने का सौभाग्य मिला है: पुजारा

नयी दिल्ली/राजकोट. भारत के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक और एक दशक से अधिक समय तक टेस्ट क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजी की धुरी रहे चेतेश्वर पुजारा ने रविवार को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा की, जिससे उनके शानदार टेस्ट करियर का अंत हो गया. इस 37 वर्षीय खिलाड़ी में सोशल मीडिया पर संन्यास लेने की घोषणा की. पुजारा ने भारत की तरफ से 103 टेस्ट मैच खेले. उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2023 में खेला था.

पुजारा ने कहा, ”राजकोट के छोटे से शहर से एक छोटे लड़के के रूप में मैंने अपने माता-पिता के साथ सितारों में शामिल होने का लक्ष्य बनाया और भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का सपना देखा. मुझे तब पता नहीं था कि यह खेल मुझे इतना कुछ देगा. इस खेल ने मुझे अमूल्य अवसर, अनुभव, उद्देश्य, प्यार और सबसे बढ.कर अपने राज्य और इस महान राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया. ” पुजारा ने भावुक होते हुए कहा, ”भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना और हर बार मैदान पर कदम रखते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करना – इसका वास्तविक अर्थ शब्दों में बयां करना असंभव है. लेकिन जैसा कि सभी चीजों का अंत होता है और मैंने भी भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का निर्णय लिया है.”

टेस्ट क्रिकेट के विशेषज्ञ बल्लेबाज पुजारा का संन्यास लेने का फैसला पूरी तरह से आश्चर्यजनक नहीं था, क्योंकि टीम के दो अन्य दिग्गज खिलाड़ियों विराट कोहली और रोहित शर्मा ने इस साल की शुरुआत में इंग्लैंड दौरे से पहले टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, जबकि उनके एक अन्य साथी आर अश्विन ने दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच में ही संन्यास ले लिया था. पुजारा ने अपने टेस्ट करियर में 43.60 की औसत से 7195 रन बनाए. वह भारत के सर्वकालिक सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में आठवें स्थान पर हैं. उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 21301 रन भी बनाए हैं.

उम्मीद की जा रही थी कि पुजारा आगामी घरेलू सत्र में सौराष्ट्र की तरफ से खेलेंगे लेकिन इस स्टार बल्लेबाज ने सोचा कि यह क्रिकेट को अलविदा कहने का सही समय है. सौराष्ट्र क्रिकेट संघ के अध्यक्ष जयदेव शाह ने पीटीआई से कहा, ”हमें उम्मीद थी कि वह आगामी सत्र में खेलेंगे, लेकिन हम उनके फ.ैसले का सम्मान करते हैं. सौराष्ट्र और भारतीय क्रिकेट के लिए वह एक महान खिलाड़ी रहे हैं. मैं उन्हें मैदान पर अलविदा कहते हुए देखना पसंद करता, लेकिन यह उनका फैसला है और हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं.” पुजारा ने शाह की कप्तानी में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था.

भारतीय टीम से दूर रहने के दौरान, पुजारा ने कमेंट्री की ओर रुख किया और हाल ही में ब्रिटेन में हुई भारत-इंग्लैंड श्रृंखला की प्रसारण टीम का हिस्सा रहे. पिछले महीने तक, वह घरेलू क्रिकेट में एक और साल खेलने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे थे और कमेंट्री करते हुए भी अपनी फिटनेस पर ध्यान दे रहे थे. पुजारा ने 2010 से 2023 तक के अपने करियर में 19 शतक और 35 अर्धशतक जमाए. राहुल द्रविड़ के संन्यास लेने के बाद वह विशेष रूप से विदेशी परिस्थितियों में भारतीय टेस्ट टीम की दीवार बन गए.

पुजारा का पारंपरिक तरीके का खेल भले ही आकर्षक नहीं लगे लेकिन वह क्रीज पर टिककर खेलने में माहिर थे. गेंदबाजों को थका देने वाली अपनी बल्लेबाजी के कारण उन्होंने 2018 और 2021 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे में भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
सौराष्ट्र के वर्तमान मुख्य कोच नीरज ओडेदरा ने कहा, ”मुझे उनसे संन्यास के फैसले की उम्मीद नहीं थी, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने यह फैसला तब लिया होगा जब उन्हें पता था कि वह भारत के लिए दोबारा नहीं खेल पाएंगे. भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान अतुलनीय है. मैं कहूंगा कि यह थोड़ा देर से लिया गया, लेकिन एक अच्छा फैसला है.” एक व्यक्ति के रूप मे पुजारा विनम्रता की प्रतिमूर्ति हैं. अपने संन्यास संदेश में, उन्होंने उन लोगों और संस्थाओं का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनको एक अच्छा खिलाड़ी बनाने में योगदान दिया.

पुजारा ने कहा, ”मैं बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) और सौराष्ट्र क्रिकेट संघ का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने मुझे मौका दिया और मेरा समर्थन किया. अपने गुरुओं, प्रशिक्षकों और आध्यात्मिक गुरु के अमूल्य मार्गदर्शन के बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता. मैं उनका सदैव ऋणी रहूंगा.” उन्होंने कहा, ”मैं अपने सभी साथियों, सहयोगी स्टाफ, नेट गेंदबाजों, विश्लेषकों, लॉजिस्टिक्स टीम, अंपायरों, ग्राउंड स्टाफ, स्कोररों, मीडिया र्किमयों और उन सभी लोगों को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं, जो पर्दे के पीछे अथक परिश्रम करते हैं ताकि हम इस खेल में प्रतिस्पर्धा कर सकें और इसे खेल सकें, जिसे हम दिल से चाहते हैं. मैं इस खेल के सभी प्रशंसकों का भी आभार व्यक्त करता हूं.” पुजारा ने कहा, ”और निश्चित रूप से यह सब मेरे परिवार मेरे माता-पिता, मेरी पत्नी पूजा, मेरी बेटी अदिति, मेरे ससुराल वालों और मेरे परिवार के बाकी सदस्यों के त्याग और अटूट समर्थन के बिना संभव या सार्थक नहीं हो पाता. उन्होंने वास्तव में मेरे इस सफर को सार्थक बनाने में अमूल्य योगदान दिया.”

कोई पछतावा नहीं, लंबे समय तक खेलने का सौभाग्य मिला है: पुजारा
पिछले दो साल से भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे चेतेश्वर पुजारा किसी और से बेहतर समझते हैं कि बिना किसी पछतावे के राष्ट्रीय टीम से विदाई लेने का यह सही समय है. सैंतीस साल के पुजारा ने रविवार को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की. उन्होंने 103 टेस्ट मैचों में 19 शतकों के साथ 7195 रन बनाए हैं जिसमें उनका औसत 43 से अधिक का रहा है.

पुजारा ने अपने गृहनगर में पत्रकारों से कहा, ” मुझे कोई पछतावा नहीं है. मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मैंने इतने लंबे समय तक भारतीय टीम के लिए खेल सका. बहुत कम खिलाड़ियों को ऐसा मौका मिलता है इसलिए मैं अपने परिवार और उन लोगों का बहुत आभारी हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया.” उन्होंने इंग्लैंड में हाल ही में हुई टेस्ट श्रृंखला के दौरान एक प्रसारक के रूप में काम करना शुरू किया है. उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें कमेंट्री में अपना करियर मिल गया है.

पुजारा ने कहा, ”मुझे बहुत खुशी है कि मैं यह सब छोड़ रहा हूं, लेकिन साथ ही मैं खेल से जुड़ा रहूंगा. मैं अब कमेंट्री कर रहा हूं और मैंने मीडिया का काम भी शुरू कर दिया है. मैं क्रिकेट खेलने नहीं जा रहा हूं, लेकिन मैं भारतीय टीम को देखता रहूंगा और उस पर कमेंट्री करूंगा. खेल से जुड़ाव जारी रहेगा.” सौराष्ट्र के इस बल्लेबाज ने 2010 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया, लेकिन 2012 में राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद ही उन्होंने अगले एक दशक तक बल्लेबाजी क्रम में तीसरे नंबर पर अपनी जगह पक्की कर ली.

उनके ऑस्ट्रेलिया के दो यादगार दौरे किये जिसमें 2018-19 की श्रृंखला उनके और भारतीय टीम के लिए बेहद खास रही थी. पुजार ने इस दौरे पर तीन शतकों के साथ 521 रन बनाए और 1258 गेंदों का सामना किया. यह हमेशा उनकी स्थायी विरासत का हिस्सा रहेगा.
पुजारा ने कहा, ” मैदान पर कई बेहतरीन पल रहे हैं, लेकिन अगर मुझे किसी एक टेस्ट श्रृंखला को चुनना है, तो 2018 में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर हुई श्रृंखला मेरे क्रिकेट करियर की सबसे अच्छी उपलब्धियों में से एक थी और भारतीय टीम के लिए भी सबसे अच्छी यादों में से एक थी.” उन्होंने कहा, ”यह उन बेहतरीन श्रृंखला में से एक थी जिसका मैं हिस्सा रहा हूं.” पुजारा ने 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने टेस्ट पदार्पण की दूसरी पारी में लक्ष्य का पीछा करते हुए 72 रन बनाये थे. वह भारतीय टीम के लिए अपने करियर के आगाज को याद कर थोड़े भावुक भी हुए.

पुजारा ने कहा, ”मैंने 2010 में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया था, जो मेरे क्रिकेट करियर का सबसे गौरवपूर्ण क्षण था. जब मैंने 2010 में माही भाई (महेंद्र सिंह धोनी) की कप्तानी में पदार्पण किया तो यह मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा था क्योंकि टीम में कुछ महान खिलाड़ी थे.” उन्होंने कहा, ” उस टीम में राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर जैसे खिलाड़ी थे. मैं अब भी उन नामों को याद करने की कोशिश कर रहा हूं जिन्हें देखते हुए मैं बड़ा हुआ हूं, इसलिए यह मेरे क्रिकेट करियर के सबसे गौरवपूर्ण पलों में से एक था.” पुजारा ने इस मौके पर अपनी मां रीना पुजारा को याद किया जिनका 2005 में निधन हो गया था. पुजारा उस समय 17 साल के थे.

उन्होंने कहा, ” वह हमेशा मेरे पिता से कहती थीं कि अपने बेटे की चिंता मत करो, वह आखिरकार भारतीय टीम के लिए खेलेगा और उनके शब्द सच हो गए. मुझे यकीन है कि मैंने अपने क्रिकेट सफर में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन पर उन्हें बहुत गर्व होगा.” पुजारा ने कहा, ”लेकिन साथ ही मुझे उनके शब्द अभी भी याद हैं, वह मुझसे कहती थीं कि चाहे तुम कितने भी बड़े क्रिकेटर बन जाओ, तुम्हें एक अच्छा इंसान बनना चाहिए. मुझे यह अभी भी याद है और उन्हें मुझ पर बहुत गर्व होगा.” इस दिग्गज बल्लेबाज ने अपने आध्यात्मिक गुरु हरिचरण दास जी महाराज का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने दबाव वाले पलों में उन्हें शांत और संतुलित रहने में मदद की.

उन्होंने कहा, ”मैं अपने आध्यात्मिक गुरु, श्री हरिचरण दास जी महाराज को भी धन्यवाद देना चाहूंगा, जिन्होंने मेरी आध्यात्मिक यात्रा में योगदान दिया है. उनके शब्द थे, ‘आपको मानसिक रूप से शांत रहना होगा और खेल पर ध्यान केंद्रित करना होगा क्योंकि आप बहुत दबाव वाली परिस्थितियों में खेलते हैं, न केवल क्रिकेट में बल्कि जीवन में भी’. उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया है ताकि मैं संतुलित और केंद्रित रह सकूं.”

भारतीय क्रिकेट जगत ने पुजारा के धैर्य और जज्बे की सराहना की

भारतीय क्रिकेट जगत ने रविवार को खेल के सभी प्रारूप से संन्यास लेने वाले स्टार बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा की उनके धैर्य, दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ भाव से खेलने के लिए जमकर सराहना की. पुजारा ने भारत की तरफ से 103 टेस्ट मैच खेले और 43.60 की औसत से 7195 रन बनाए.

क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया में हुई श्रृंखला में उनके प्रदर्शन को सर्वश्रेष्ठ में से एक बताया. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”पुजारा आपको तीसरे नंबर पर खेलते देखना हमेशा सुकून देने वाला रहा. हर बार आप खेलते हुए संयम, साहस और टेस्ट क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव लेकर आए. ” तेंदुलकर ने लिखा, ”आपकी मजबूत तकनीक और दबाव में संयम टीम के लिए एक स्तंभ रहा है. ऑस्ट्रेलिया में 2018 की श्रृंखला में मिली जीत कई उपलब्धियों में से एक है. यह आपके अविश्वसनीय लचीलेपन और मैच में जीत दिलाने वाले रनों के बिना संभव नहीं होता. ” भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने एक्स पर लिखा, ”जब तूफान आया तो वह डटे रहे, जब उम्मीदें धूमिल हो रही थीं तब उन्होंने अपना जुझारूपन दिखाया. पुज्जी को बधाई.” पूर्व भारतीय ऑलराउंडर युवराज सिंह ने राष्ट्रीय टीम के प्रति पुजारा की प्रतिबद्धता की सराहना की.

युवराज ने लिखा, ”ऐसा व्यक्ति जिसने हमेशा अपना मन, शरीर और आत्मा देश के लिए लगा दी. शानदार करियर के लिए बहुत-बहुत बधाई पुज्जी. फिर मिलेंगे.” भारत के पूर्व बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने लिखा, ”उनका साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प हमेशा स्पष्ट दिखाई दिया और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गाबा टेस्ट में उन्हें जो चोटें लगीं, वे मेरे लिए पुजारा के उस क्रिकेटर का प्रतीक हैं जो अपने देश के लिए अपना सब कुछ झोंक देता है. शाबाश और आपको दूसरी पारी के लिए शुभकामनाएं.” पुजारा के करियर के दौरान भारत के कोच रहे अनिल कुंबले ने कहा, ”शानदार करियर के लिए बधाई! आप इस अद्भुत खेल के एक महान दूत रहे हैं. क्रिकेट के मैदान पर आपकी सभी उपलब्धियों पर हम सभी को गर्व है.” कुंबले ने लिखा, ”आपने टीम के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया. आपके साथ काम करना सौभाग्य की बात थी और आप अपनी दूसरी पारी में भी इसी तरह चमकते रहें. आपको, पूजा, अदिति और आपके पिताजी को शुभकामनाएं. शाबाश.” पुजारा के लंबे समय तक साथी रहे अजिंक्य रहाणे ने कहा, ”पुज्जी, शानदार करियर के लिए बधाई. आपके साथ खेलने के हर पल का आनंद लिया और साथ में मिली विशेष टेस्ट जीत को हमेशा संजो कर रखेंगे. दूसरी पारी के लिए शुभकामनाएं.” भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने भारतीय क्रिकेट में पुजारा के योगदान का जिक्र किया और उन्हें भारतीय बल्लेबाजी का मजबूत स्तंभ बताया.

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा, ”चेतेश्वर पुजारा का करियर दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ भाव से खेलने का शानदार उदाहरण है. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट की भावना को साकार किया. विपक्षी आक्रमण को ध्वस्त करने की उनकी क्षमता और एकाग्रता की उनकी अपार शक्ति ने उन्हें भारतीय बल्लेबाजी का मजबूत स्तंभ बनाया. ” उन्होंने कहा, ”उन्होंने दिखाया कि खेल के पारंपरिक मूल्यों के प्रति सर्मिपत रहते हुए भी शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू, दोनों स्तरों पर भारतीय क्रिकेट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अद्भुत रही है. उन्होंने खेल और देश को जो कुछ भी दिया है, उसके लिए हम उनके आभारी हैं.” पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने कहा, ”शानदार टेस्ट करियर के लिए बधाई चेतेश्वर. आपका धैर्य, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत प्रेरणादायक थी और आपने जो हासिल किया है उस पर आपको गर्व हो सकता है. दूसरी पारी के लिए शुभकामनाएं.” पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना ने कहा, ”एक दिग्गज को सलाम. चेतेश्वर पुजारा के अविश्वसनीय करियर को अलविदा कहने का समय आ गया है. आपने हमें अनगिनत सुखद यादें दी हैं.” पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने कहा, ”आपके साहसिक खेल की चर्चा हमेशा आपके नाम से पहले होती है. शानदार करियर के लिए बहुत-बहुत बधाई. आपकी आक्रामकता आपके डिफेंस में साफ. दिखाई देती थी. आपने भारत को गौरवान्वित किया है, पुज्जी. दूसरी पारी के लिए आपको शुभकामनाएं.”

भारतीय क्रिकेट में धैर्य और एकाग्रता की प्रतिमूर्ति रहे हैं पुजारा
चेतेश्वर पुजारा ना तो विराट कोहली की तरह दिलकश कवर ड्राइव लगाते थे , ना ही रोहित शर्मा की तरह पुल शॉट लगाते थे , उनके पास ऋषभ पंत की तरह सांसे रोक देने वाले गिरते हुए हुक शॉट खेलने की भी क्षमता नहीं थी लेकिन टी 20 क्रिकेट के युग में उन्होंने अपनी बेहतरीन तकनीक , मजबूत मानसिकता और अदम्य धैर्य के साथ टेस्ट क्रिकेट के हर पैमाने पर खुद को साबित किया.

भारतीय टीम में सचिन तेंदुलकर , राहुल द्रविड़ , वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों के दौर के बाद कलात्मक बल्लेबाजों के बीच पुजारा 2013-14 से 2023 तक 100 से ज्यादा टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाजी की धुरी बने रहे. भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान छक्कों या स्ट्राइक रेट से नहीं , बल्कि क्रीज पर बिताया समय , धैर्य और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आ क्रमणों का दिलेरी से सामना करने से मापा जाता है. उस दौर में भारतीय बल्लेबाजी की तुलना अगर किसी भव्य इमारत से करें तो कोहली उसके वास्तुकार थे लेकिन इसकी नींव निश्चित रूप से चेतेश्वर पुजारा थे. धैर्य के साथ खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट को पसंद करने वालों के लिए पुजारा उस दौर की याद दिलाते थे जब टी 20 क्रिकेट का कोई अस्तित्व ही नहीं था.

पुजारा के पिता अरविंद ने प्रथम श्रेणी के कुछ मैच खेले थे और सीमित संसाधनों के बावजूद चेतेश्वर के लिए उनके सपने बड़े थे.
टी 20 क्रिकेट की लोकप्रियता के बाद मौजूदा दौर के प्रशंसकों ने पुजारा की बल्लेबाजी को अप्रत्याशित रूप से अपरंपरागत करार दिया लेकिन दायें हाथ के इस बल्लेबाज के पिता ने बचपन में उनके दिमाग में यह बात बैठा दी थी टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है.
उनकी पत्नी पूजा ने अपनी किताब ‘ द डायरी ऑफ ए क्रिकेटर्स वाइफ : एन अनयूजअल मेमॉयर ‘ में संक्षेप में कहा है , ” चेतेश्वर पुजारा कम बोलने वाले और भावनाओं का कम इजहार करने वाले व्यक्ति हैं. अगर एक मुस्कान से काम चल सकता है तो वह बोलना पसंद नहीं करते. अगर एक वाक्य तीन शब्दों में खत्म हो सकता है , तो वह एक और शब्द जोड़ने की कोशिश नहीं करेंगे. ” वह टीम के ऐसे ‘ भरोसेमंद ‘ योद्धा थे जिसे आप युद्ध में जाते समय अपने साथ रखना चाहेंगे. जब कोहली ने कमान संभाली , तो पुजारा जानते थे कि उन्हें क्या करना है.

गाबा में जब पंत ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ी तो दूसरी ओर पुजारा ना सिर्फ क्रीज पर डटे रहे बल्कि तेज गेंदों की 11 गेंदें अपने शरीर पर झेली. उनकी 211 गेंद में 56 रन की पारी ने उनके व्यक्तित्व को बखूब ही दर्शाया. एक ठोस व्यक्ति , एक मजबूत शरीर और टीम के लिए जरूरी रन. जब ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत के बाद टीम में हर कोई अपनी चमक दिखा रहा था तो वहीं पुजारा के शरीर के घाव ही उनके सम्मान का प्रतीक बन गए.

गाबा में पंत की आक्रामक और असाधारण पारी की सफलता का श्रेय भी काफी हद तक पुजारा के उत्कृष्ट और साहसिक बल्लेबाजी को जाता है. सौराष्ट्र क्रिकेट के राजकोट स्थित मैदान 80 और 90 के दशक में आम तौर पर एकदिवसीय क्रिकेट की मेजबानी करता था जहां सपाट पिच के कारण बड़े स्कोर वाले मैच होते थे. भारतीय रेलवे के कर्मचारी अरविंद पुजारा का एक सपना था और वह था एक ऐसा टेस्ट क्रिकेटर बनाना , जो न केवल खेले बल्कि विशिष्टता के साथ अपनी पहचान भी बनाए.

सीमित संसाधनों के साथ वह मुंबई गये भारत के पूर्व क्रिकेटर करसन घावरी से मिलकर उन्होंने बेटे को क्रिकेटर बनाने को लेकर राय मांगी. घावरी ने पुजारा को बल्लेबाजी करते देखा और अरविंद को को हरी झंडी दे दी. जिसके बाद सीनियर पुजारा ने अपने बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया. यह सफर हालांकि आसान नहीं था और जब पुजारा के वयस्क होने से पहले ही उनकी मां रीना कैंसर से जंग हार गईं तो यह और भी मुश्किल हो गया.

कल्पना कीजिए कि एक 17 साल के लड़के पर क्या बीती होगी , जब उसने एक जिला मैच खेलने के बाद अपनी मां से बात की और उन्हें बताया कि वह शाम तक घर पहुंच जाएगा. लेकिन जब वह घर पहुंचा तो उसकी सबसे बड़ी प्रेरणा हमेशा के लिए दुनिया छोड़कर जा चुकी थी. अरविंद ने इस संवाददाता को कुछ साल पहले दिये साक्षात्कार में कहा था कि उनकी पत्नी के निधन के बाद उनका बेटे की आंखे कई दिनों तक नम नहीं हुई थी और यह उनके लिए काफी चिंता का सबब था. उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने अपने दर्द को पूरी तरह से अंदर दबा लिया था.

पुजारा के लिए शायद व्यक्तिगत जीवन में दर्द सहने से उनके लिए क्रिकेट के मैदान पर मुश्किलों का सामना करना आसान हो गया था. वह एक आध्यात्मिक व्यक्ति हैं और अति उत्साह के साथ जश्न मनाने में विश्वास नहीं करते. वह खुशी मिलने और अच्छे समय पर अपने गुरुजी के आश्रम में जाकर उनका आशीर्वाद लेना पसंद करते हैं. पुजारा हमेशा से ऐसे ही रहे हैं – बिना किसी दिखावे या तामझाम के , बस सीधे – सादे.

उन्होंने 2018-19 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 1258 गेंदों का सामना कर 521 रन बनाये. उन्होंने एक छोर संभालते हुए अपने करियर के चरम पर चल रहे जोश हेजलवुड , पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे गेंदबाजों को खूब थकाया. उन्होंने इस दौरे पर तीन शतक जड़े जिसमें से एक शतक मेलबर्न के मैदान पर आया था. इस मैच के दौरान उनके पिता का मुंबई में ऑपरेशन हुआ था और मैच खत्म होने तक पुजारा को इसके बारे में बताया नहीं गया था.

यह वह श्रृंखला थी जिसने पुजारा को भारत के आधुनिक टेस्ट मैच के महान खिलाड़ियों में से एक बनाया. वह एक अडिग चट्टान बन कर गेंदबाजों के दिमाग में बस गये. उन्होंने 7000 से अधिक रन और 19 शतकों के बावजूद वैसी सराहना नहीं मिली जिसके वह हकदार रहे हैं.

ऐसे दौर में जहां हर कोई स्ट्राइक – रेट , आईपीएल करार और एक सत्र के आईपीएल वंडर्स के अजीबोगरीब जश्न को लेकर जुनूनी है , पुजारा की सोच पुरानी लगने लगी थी. वह कभी आधुनिक भारतीय क्रिकेटर की छवि में फिट नहीं बैठे. न कोई ड्रामा , न टीवी पर भर – भरकर ब्रांड एंडोर्समेंट , न सोशल मीडिया पर दिखावा. वह तो बस भारत के लिए बल्लेबाजी करते थे , और बल्लेबाजी करते थे , और बल्लेबाजी करते थे.

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