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हम दो रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं : भारत

रूस से तेल आयात कम करने के मुद्दे पर भारत का रुख बहुत अच्छा रहा है: ट्रंप

नयी दिल्ली/न्यूयॉर्क. भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि कच्चे तेल की उसकी खरीद किफायती कीमतों पर विविध स्रोतों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर आधारित है और वह रूसी तेल कंपनियों ‘लुकोइल’ तथा ‘रोसनेफ्ट’ पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नवीनतम प्रतिबंधों के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संकेत मिल रहे हैं कि भारतीय रिफाइनरी धीरे-धीरे सब्सिडी वाले रूसी कच्चे तेल की खरीद कम कर रही हैं और अमेरिका से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर विचार कर रही हैं.
जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए लगातार प्रयासरत हैं.

उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दक्षिण कोरिया में दिए गए उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ”भारत के साथ एक व्यापार समझौता कर रहा है.” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में दोनों रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि नयी दिल्ली इसके प्रभावों का अध्ययन कर रही है.

उन्होंने कहा, ”हम रूसी तेल कंपनियों पर हाल ही में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं. हमारे निर्णयों में स्वाभाविक रूप से वैश्विक बाजार की बदलती गतिशीलता को ध्यान में रखा जाता.” जायसवाल ने कहा, ”ऊर्जा स्रोत के व्यापक प्रश्न पर हमारी स्थिति सर्वविदित है. इस प्रयास में, हम अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों से किफायती ऊर्जा प्राप्त करने की अनिवार्यता से निर्देशित हैं.” इस मामले के जानकारों ने बताया कि दोनों रूसी तेल उत्पादकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के नवीनतम कदमों के बाद रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद में गिरावट देखी जा रही है.

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका द्वारा पिछले सप्ताह मॉस्को के दो शीर्ष कच्चे तेल निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल के लिए कोई नया ऑर्डर नहीं दिया है, क्योंकि वे बदले हुए परिदृश्य का आकलन कर रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता में कोई त्रुटि न रहे. अमेरिका ने पिछले सप्ताह रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए थे, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध समाप्त करने के लिए मॉस्को पर दबाव बनाया जा सके.

पिछले कुछ सप्ताहों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे कहा है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा. ट्रंप के पहले दावे के बाद, भारत ने कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी. वहीं, एक अलग सवाल के जवाब में, जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ”हम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत जारी रखेंगे और ये चर्चाएं जारी रहेंगी.” ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद से नयी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंध गंभीर तनाव में हैं.
भारत ने अमेरिकी कार्रवाई को ”अनुचित और अविवेकपूर्ण” बताया.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कुआलालंपुर में आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत की. ऐसा समझा जाता है कि जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी व्यापक चर्चा की. जायसवाल ने कहा कि अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह परियोजना पर भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट दी है.

रूस से तेल आयात कम करने के मुद्दे पर भारत का रुख बहुत अच्छा रहा है: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा कि रूस से तेल आयात कम करने के मुद्दे पर भारत का रुख बहुत अच्छा रहा है. उन्होंने अपने इस दावे को दोहराया कि मॉस्को से अपनी ऊर्जा खरीद में भारत उल्लेखनीय कमी लाएगा. ट्रंप बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ शिखर बैठक के बाद वाशिंगटन लौटते समय एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों के साथ बातचीत कर रहे थे. उनसे रूसी तेल खरीद के बारे में पूछा गया.

ट्रंप ने कहा, ”शी लंबे समय से रूस से तेल खरीद रहे हैं. यह चीन के एक बड़े हिस्से की देखभाल करता है. और, आप जानते हैं, मैं कह सकता हूँ कि भारत इस मोर्चे पर बहुत अच्छा रहा है. लेकिन हमने तेल पर ज़्यादा चर्चा नहीं की. हमने साथ मिलकर काम करने पर चर्चा की ताकि यह देखा जा सके कि क्या हम उस युद्ध को ख.त्म कर सकते हैं.” ट्रंप पिछले कुछ दिनों से दावा करते रहे हैं कि दिल्ली ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह रूस से अपने तेल आयात में उल्लेखनीय कमी लाएगी.

पिछले सप्ताह ट्रंप ने अपने इस दावे को दोहराया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है और वर्ष के अंत तक वह इसे लगभग शून्य पर ले आएगा. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत तेल और गैस का एक महत्वपूर्ण आयातक है, और अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना दिल्ली की निरंतर प्राथमिकता रहा है.

इसने कहा, ”हमारी आयात नीतियाँ पूरी तरह इसी उद्देश्य से निर्देशित होती हैं. स्थिर ऊर्जा मूल्य और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारी ऊर्जा नीति के दोहरे लक्ष्य रहे हैं. इसमें हमारा ऊर्जा स्रोतों का व्यापक आधार बनाना और बाज.ार की परिस्थितियों के अनुसार विविधीकरण करना शामिल है.” विदेश मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में कहा था, ”जहाँ तक अमेरिका का सवाल है, हम कई वर्षों से अपनी ऊर्जा खरीद का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले एक दशक में इसमें लगातार प्रगति हुई है. वर्तमान प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को गहरा करने में रुचि दिखाई है. इस पर चर्चा जारी है.”

हम ऊर्जा सुरक्षा को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों पर विचार कर रहे: कच्चे तेल की खरीद पर भारत

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि कच्चे तेल की उसकी खरीद किफायती कीमतों पर विविध स्रोतों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर आधारित है और वह रूसी तेल कंपनियों ‘लुकोइल’ तथा ‘रोसनेफ्ट’ पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नवीनतम प्रतिबंधों के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संकेत मिल रहे हैं कि भारतीय रिफाइनरी धीरे-धीरे सब्सिडी वाले रूसी कच्चे तेल की खरीद कम कर रही हैं और अमेरिका से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर विचार कर रही हैं.
जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए लगातार प्रयासरत हैं.

उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दक्षिण कोरिया में दिए गए उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ”भारत के साथ एक व्यापार समझौता कर रहा है.” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में दोनों रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि नयी दिल्ली इसके प्रभावों का अध्ययन कर रही है.

उन्होंने कहा, ”हम रूसी तेल कंपनियों पर हाल ही में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं. हमारे निर्णयों में स्वाभाविक रूप से वैश्विक बाजार की बदलती गतिशीलता को ध्यान में रखा जाता है.” जायसवाल ने कहा, ”ऊर्जा स्रोत के व्यापक प्रश्न पर हमारी स्थिति सर्वविदित है. इस प्रयास में, हम अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों से किफायती ऊर्जा प्राप्त करने की अनिवार्यता से निर्देशित हैं.” इस मामले के जानकारों ने बताया कि दोनों रूसी तेल उत्पादकों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के नवीनतम कदमों के बाद रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद में गिरावट देखी जा रही है.

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका द्वारा पिछले सप्ताह मॉस्को के दो शीर्ष कच्चे तेल निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल के लिए कोई नया ऑर्डर नहीं दिया है, क्योंकि वे बदले हुए परिदृश्य का आकलन कर रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता में कोई त्रुटि न रहे. अमेरिका ने पिछले सप्ताह रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए थे, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध समाप्त करने के लिए मॉस्को पर दबाव बनाया जा सके.

पिछले कुछ सप्ताहों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे कहा है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा. ट्रंप के पहले दावे के बाद, भारत ने कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी. वहीं, एक अलग सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ”हम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत जारी रखेंगे और ये चर्चाएं जारी रहेंगी.” ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद से नयी दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंध गंभीर तनाव में हैं.
भारत ने अमेरिकी कार्रवाई को ”अनुचित और अविवेकपूर्ण” बताया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कुआलालंपुर में आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत की.

ऐसा समझा जाता है कि जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी व्यापक चर्चा की. जायसवाल ने कहा कि अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह परियोजना पर भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट दी है.
क्वाड शिखर सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि यह चारों साझेदारों के बीच राजनयिक परामर्श के माध्यम से निर्धारित किया गया है.

भारत इस साल के अंत में क्वाड शिखर सम्मेलन आयोजित करने वाला था. हालाँकि, जापान की राजनीतिक स्थिति और भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के कारण इस साल शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसा माना जा रहा है कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह का शिखर सम्मेलन अगले वर्ष की पहली छमाही में होने की संभावना है. जायसवाल ने कहा, ”क्वाड कई क्षेत्रों में साझा हितों पर चर्चा के लिए एक मूल्यवान मंच है. नेताओं का कोई भी शिखर सम्मेलन चारों साझेदारों के बीच राजनयिक परामर्श के माध्यम से निर्धारित होता है.”

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