खरगे ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रेड्डी का विपक्षी नेताओं से परिचय कराया
नयी दिल्ली. विपक्षी दलों के नेताओं ने बुधवार को संविधान सदन (पुरानी संसद) के केंद्रीय कक्ष में उपराष्ट्रपति पद के अपने संयुक्त उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी का अभिनंदन किया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रेड्डी का परिचय देते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने एक ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया जो संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति सर्मिपत हो और रेड्डी ऐसे ही एक व्यक्ति हैं.
रेड्डी को एक प्रमुख न्यायविद बताते हुए खरगे ने कहा कि वह न्याय के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध हैं और सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता के निर्भीक समर्थक रहे हैं, तथा उन्होंने ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए हैं, जिनसे भारत के लोकतंत्र का ताना-बाना मजबूत हुआ है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि ऐसे समय में जब हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका नामांकन राज्यसभा के कामकाज में निष्पक्षता और गरिमा को बहाल करने के लिए एक दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है. खरगे ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने विपक्ष के साथ भेदभाव किया है.
कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ” उपराष्ट्रपति पद का यह चुनाव केवल एक पद के लिए चुनाव नहीं है, यह हमारे राष्ट्र की आत्मा के लिए एक वैचारिक युद्ध है. हालांकि सत्तारूढ़ दल ने आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) की विचारधारा को चुना है लेकिन हम संविधान और उसके मूल्यों को अपना मार्गदर्शक मानते हैं.” उन्होंने कहा, ” बी सुदर्शन रेड्डी न्याय, समानता और समावेशिता के शाश्वत मूल्यों के प्रतीक हैं, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी और हमारे संविधान का आधार बने.” उन्होंने सरकार पर संसद में जल्दबाजी में तथा विपक्षी दलों के बहिर्गमन के बावजूद विधेयक पारित करने का आरोप लगाया. खरगे ने आरोप लगाया कि सांसदों को बोलने की अनुमति न देकर लोकसभा अध्यक्ष ने भी इसमें भूमिका निभाई है.
रेड्डी का स्वागत करते हुए कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि संविधान पर हमला करने वालों और इसका संरक्षण करने वालों के बीच लड़ाई चल रही है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ” न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी के पास दशकों का न्यायिक और कानूनी अनुभव है. संवैधानिक मूल्यों के समर्थक होने के नाते, वह सभी दलों में लोकप्रिय हैं. उल्लेखनीय है कि उन्होंने तेलंगाना जातिगत गणना पर काम किया और राज्य में सामाजिक न्याय के लिए एक दृष्टिकोण तैयार करने में मदद की.” गांधी ने कहा, “मैंने संयोग से उनकी जेब में झांका, और मुझे आश्चर्य हुआ कि उनके पास भारत के संविधान की एक प्रति थी. वह इसे हर जगह साथ रखते हैं. उन्होंने बताया कि वह 52 सालों से इसे अपने साथ रखते आ रहे हैं और इस बात पर ज.ोर दिया कि किसी भी बातचीत में संविधान का ही अंतिम फ.ैसला होता है.” उन्होंने कहा कि रेड्डी एक बुद्धिमान और विचारधारा से जुड़े हुए व्यक्ति हैं.
गांधी ने कहा कि भाजपा जो नये विधेयक प्रस्तावित कर रही है, उस पर काफी शोरगुल हो रहा है.
उन्होंने कहा, ”हम मध्ययुगीन काल में वापस जा रहे हैं, जब राजा अपनी इच्छा से किसी को भी हटा सकता था… अगर सरकार (भाजपा) को किसी का चेहरा पसंद नहीं आता है, तो वह ईडी से उसे गिरफ्तार करने के लिए कह सकती है, और लोकतांत्रिक रूप से चुने गए व्यक्ति को 30 दिनों के भीतर (पद से) हटाया जा सकता है.” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने दावा किया कि हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव ”चुराने” के बाद भाजपा बिहार के चुनाव भी ”चुराने” में सफल हो जाएगी लेकिन जनता अब समझ चुकी है और ऐसा नहीं होने देगी.
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में पेश किए गए तीन विधेयकों का उल्लेख करते हुए खरगे ने कहा, ”संविधान संशोधन विधेयक और अन्य विधेयक जो संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के मूल मूल्यों को कमजोर करते हैं, उन्हें सत्र के अंत में छलपूर्वक पेश किया जा रहा है, जिससे सार्थक चर्चा या समीक्षा की कोई गुंजाइश नहीं बचती.” राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ”हमने देखा है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), आयकर और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जैसी स्वायत्त एजेंसियों को दमनकारी शक्तियों से लैस करने के लिए संसदीय बहुमत का घोर दुरुपयोग किया गया है.”
उन्होंने कहा, ”अब ये नए विधेयक राज्यों में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकारों को और कमजोर करने तथा अस्थिर करने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के लिए हथियार बन जाएंगे.” खरगे ने दावा किया, ”संसद में हमने विपक्ष की आवाज दबाने का बढ़ता चलन देखा है. बार-बार हमें सदन में महत्वपूर्ण जन सरोकार के मुद्दे उठाने से वंचित किया जाता है.” उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक राजनीति की विश्वसनीयता संसद पर निर्भर करती है, जो एक मजबूत मंच के रूप में कार्य करती है, जहां सदस्य स्वतंत्र रूप से और निष्पक्ष रूप से उन लोगों की शिकायतों और आकांक्षाओं को व्यक्त करते हैं जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ” हम विपक्षी दल, श्री रेड्डी के समर्थन में एकजुट हैं. हमें विश्वास है कि उनकी बुद्धिमत्ता, निष्ठा और समर्पण हमारे राष्ट्र को न्याय और एकता पर आधारित भविष्य की ओर प्रेरित और निर्देशित करेंगे.” खरगे ने सभी सांसदों से रेड्डी की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा, ”हम संसद के प्रत्येक सदस्य से आग्रह करते हैं कि वे हमारे लोकतंत्र को जीवंत और लचीला बनाने वाले मूल्यों की रक्षा और संरक्षण के इस ऐतिहासिक प्रयास में हमारा साथ दें.” उन्होंने कहा कि संसद सत्तारूढ़ पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने का साधन बनकर रह गई है, तथा कई महत्वपूर्ण विधेयक शोरगुल के बीच और बिना उचित विचार-विमर्श के पारित कर दिए गए हैं.
खरगे ने कहा कि इस तरह के कदम निष्पक्ष और प्रभावी विधायी मंच के रूप में संसद की भूमिका को कमजोर करते हैं, जनता के विश्वास को कम करते हैं, तथा न्यायसंगत चर्चा की कीमत पर सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”संसद में इन अतिक्रमण का प्रतिरोध करने और इनके विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करने के लिए, देश को उपराष्ट्रपति के रूप में श्री बी. सुदर्शन रेड्डी जैसे अनुकरणीय निष्पक्ष न्यायाधीश की आवश्यकता है. उनका नामांकन भारत को परिभाषित करने वाले लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा और उन्हें बनाए रखने के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रतिनिधित्व करता है.” उन्होंने यह भी कहा कि रेड्डी का जीवन और कार्य भारतीय संविधान की भावना, निष्पक्षता, करुणा और प्रत्येक नागरिक के सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है.
खरगे ने कहा, ”ये सिद्धांत उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में उनके नेतृत्व का मार्गदर्शन करेंगे, तथा यह सुनिश्चित करेंगे कि सदन लोकतांत्रिक संवाद के एक सच्चे गढ़ के रूप में कार्य करे.” कांग्रेस महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने कहा कि वे आठ सितंबर को मतदान का पूर्वाभ्यास कराएंगे ताकि उनके सांसदों को नौ सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान मतदान करने के तरीके के बारे में जानकारी मिल सके.
बैठक के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) नेता शरद पवार, समाजवादी पार्टी (सपा) के राम गोपाल यादव, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के तिरुचि शिवा, शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जॉन ब्रिटास और तृणमूल कांग्रेस की शताब्दी रॉय सहित कई विपक्षी नेता भी उपस्थित थे.