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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में आरएसएस की भूमिका की सराहना की, कहा- संघ ने कभी कटुता नहीं दिखाई

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना की पूरी होने जा रही शताब्दी के अवसर पर बुधवार को आरएसएस की प्रशंसा की और कहा कि प्रतिबंधों और साजिशों के बावजूद संगठन ने कभी कटुता नहीं दिखाई क्योंकि यह ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर काम करता रहा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में भाग लेते हुए मोदी ने राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि संघ जाति या पंथ के भेदभाव को दूर करके सद्भाव को बढ़ावा देने और एक समावेशी समाज का संदेश फैलाने के लक्ष्य के साथ देश के कोने-कोने तक पहुचा है।

मोदी ने कहा, ‘‘संघ ने अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उनका एकमात्र हित हमेशा राष्ट्र के प्रति प्रेम रहा है।’’ उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता सेनानियों को शरण दी और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसके नेता जेल भी गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आरोप लगाकर और झूठे मामले दर्ज करके आरएसएस की भावना को कुचलने के कई प्रयास किए गए हैं।

उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर लगे प्रतिबंध का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘आरएसएस ने अपने खिलाफ झूठे मामले दर्ज होने, लगाये गये प्रतिबंध लगाने और अन्य चुनौतियों के बावजूद कभी कटुता नहीं दिखाई, क्योंकि हम ऐसे समाज का हिस्सा हैं जहां हम अच्छे और बुरे, दोनों को स्वीकार करते हैं। उसका यही मंत्र रहा है कि जो अच्छा है, जो कम अच्छा, सब हमारा है।’’ मोदी ने कहा कि तत्कालीन आरएसएस प्रमुख माधव गोलवलकर को भी झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘फिर भी जब वहबाहर आए तो उन्होंने शांत मन से कहा: ‘‘कभी कभी जीभ दांतों के नीचे आकर दब जाती है, कुचल जाती है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ देते, क्योंकि दांत भी हमारे हैं, जीभ भी हमारी है।’’ उन्होंने कहा कि प्रत्येक ‘स्वयंसेवक’ का लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में अटूट विश्वास है, जिसने उन्हें चुनौतियों का सामना करने की शक्ति दी।

उन्होंने कहा, ‘‘जब आपातकाल लगाया गया, तो इसी विश्वास ने प्रत्येक स्वयंसेवक को उसका सामना करने की शक्ति दी।’’ प्रधानमंत्री ने आरएसएस की स्थापना के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष डाक टिकट और एक स्मारक सिक्का भी जारी किया।

उन्होंने कहा, ‘‘100 रुपये के सिक्के पर एक तरफ राष्ट्रीय चिन्ह है, तो दूसरी तरफ ंिसह पर विराजमान भारत माता की छवि जबकि स्वयंसेवक भक्ति और समर्पण के साथ उनके सामने नतमस्तक होते दिख रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि अंकित की गई है, जो अत्यंत गौरव और ऐतिहासिक महत्व का क्षण है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि 100 साल पहले विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना मात्र एक संयोग नहीं था, बल्कि यह हजारों वर्षों से चली आ रही एक परंपरा का पुनरुत्थान था। उन्होंने कहा, ‘‘संघ अपनी स्थापना के समय से ही देशभक्ति और सेवा का पर्याय रहा है।’’ मोदी ने कहा कि आरएसएस ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ में विश्वास करता है, हालांकि स्वतंत्रता के बाद इसे राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने से रोकने के प्रयास किए गए।

उन्होंने कहा, ‘‘विविधता में एकता हमेशा से भारत की आत्मा रही है, अगर यह सिद्धांत टूटा तो भारत कमजोर हो जाएगा। चुनौतियों के बावजूद, आरएसएस मजबूती से खड़ा है और राष्ट्र की अथक सेवा कर रहा है।’’ शताब्दी समारोह का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया था और इसमें आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संस्कृति मंत्री गजेंद्र ंिसह शेखावत शामिल हुए।

केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में नागपुर में स्थापित आरएसएस की स्थापना एक स्वयंसेवी संगठन के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना था।
मोदी स्वयं एक आरएसएस प्रचारक थे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आने से पहले एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। भाजपा की वैचारिक प्रेरणा ंिहदुत्ववादी संगठन से मिलती है।

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